Home Uttar Pradesh यूपी में वही हुआ, जिसकी चेतावनी योगी ने दी थी!

यूपी में वही हुआ, जिसकी चेतावनी योगी ने दी थी!

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में जिस खतरे की ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही इशारा किया था, वह अब साफ दिखाई देने लगा है। SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसके साथ ही राज्य की चुनावी सियासत में हलचल तेज हो गई है। योगी ने पहले कहा था कि अगर करोड़ों मतदाताओं के नाम कटे, तो 2027 और 2029 के चुनावों में बड़ा नुकसान हो सकता है।

आज भले ही साढ़े चार करोड़ का आंकड़ा न आया हो, लेकिन करीब ढाई से तीन करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होना किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है।उत्तर प्रदेश में अब 12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची जारी की जा रही है। 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी और 6 मार्च को अंतिम सूची सामने आएगी। लेकिन सवाल सिर्फ प्रक्रिया का नहीं है, सवाल इसके असर का है। इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से चुनावी संतुलन बिगड़ सकता है, खासकर तब जब बड़ी आबादी रोज़गार या मजबूरी में अपने पते से दूर रहती है।

अखिलेश यादव इसे राजनीतिक साज़िश बता रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि SIR में न जाति देखी गई, न पार्टी। जो सत्यापन में शामिल नहीं हो सका, उसका नाम कट गया। योगी आदित्यनाथ इसी आशंका को लेकर पहले से सतर्क थे, क्योंकि नुकसान की सीधी मार आखिरकार सत्ताधारी दल पर ही पड़ती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में झटका खा चुकी बीजेपी के लिए यह स्थिति और गंभीर हो जाती है। अगर अंतिम मतदाता सूची में भी बड़ी संख्या में नाम वापस नहीं जुड़े, तो 2027 की राह आसान नहीं होगी।यही वजह है कि SIR अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यूपी की राजनीति का निर्णायक मोड़ बन चुका है।

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