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पहली बार गुस्से से लाल हुये योगी ! दे डाली बड़ी चेतावनी ! पंकज केशव शाह के उड़े होश !

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उत्तर प्रदेश भाजपा इस वक्त अंदर ही अंदर उबल रही है। कुर्सियों पर बैठे लोग बेचैन हैं, लॉबियां सक्रिय हैं और दिल्ली से लखनऊ तक एक अदृश्य रस्साकशी चल रही है। फर्क बस इतना है कि इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुप नहीं हैं।

वह पूरी तरह एक्शन मोड में हैं—और गुस्से में लाल। यह पहला मौका है जब योगी आदित्यनाथ ने विधायकों और मंत्रियों को बिना किसी घुमावदार भाषा के, सीधा फरमान सुना दिया है—“काम नहीं किया तो टिकट कोई नहीं बचा पाएगा, न दिल्ली, न संगठन, न कोई लॉबी।” दरअसल, पूरा मामला सिर्फ विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का नहीं है। मामला 2027 का है। मामला सत्ता के भविष्य का है।जब 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम कटने की खबर सामने आई और ज़मीनी स्तर पर भाजपा के विधायक-मंत्री इसे हल्के में लेते दिखे, तभी योगी आदित्यनाथ का सब्र टूट गया। इसी बीच अचानक सभी विधायकों और मंत्रियों के पास फोन जाता है—शाम 7 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस में जुड़ना अनिवार्य है। फोन की घंटी बजते ही अफरा-तफरी मच जाती है। विधायक एक-दूसरे को फोन करने लगते हैं—“कहीं बड़ा बदलाव तो नहीं?” “सरकार में कुछ होने वाला है क्या?”शाम होते-होते जब स्क्रीन पर भाजपा के सारे विधायक दिखाई देते हैं और सामने होते हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ—तो माहौल खुद-ब-खुद गंभीर हो जाता है। एक तरफ पंकज चौधरी, केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक जुड़े होते हैं, लेकिन पूरे दृश्य में जो सबसे तीखे तेवर में नजर आते हैं, वह सिर्फ और सिर्फ योगी आदित्यनाथ होते हैं।

योगी बिना भूमिका बांधे सीधे मुद्दे पर आते हैं।वह साफ शब्दों में कहते हैं—“आप लोग यह मानकर बैठे हैं कि जिनके नाम कटे हैं वो विपक्ष के वोटर हैं। मैं साफ कर दूं—इनमें सबसे ज्यादा भाजपा के वोटर हैं। अगर अब भी नहीं जागे तो आने वाले चुनाव में आप लोगों का टिकट बचाना मुश्किल हो जाएगा।”यह चेतावनी सिर्फ प्रशासनिक नहीं थी, यह राजनीतिक भविष्य से जुड़ी थी। खास बात यह रही कि जिन विधायकों को साधने की कोशिश पंकज चौधरी ज़मीनी स्तर पर कर रहे हैं, उन्हीं विधायकों को पंकज चौधरी के सामने ही योगी आदित्यनाथ ने सख्त लहजे में ललकार दिया। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि इस दौरान पंकज चौधरी वीडियो कॉल पर असहज और सकपकाए हुए नजर आए, लेकिन योगी आदित्यनाथ के सामने बोलने की किसी की हिम्मत नहीं हुई। मीटिंग के दौरान जब एक मंत्री ने यह कह दिया कि “गलती हमारी नहीं, BLO की है…”तो योगी आदित्यनाथ का रौद्र रूप सामने आ गया। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा—“BLO क्या आपके क्षेत्र में नहीं आते? क्या वे आपकी सरकार के कर्मचारी नहीं हैं? बहानेबाजी मत करिए, काम पर लग जाइए।”राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि यह बयान पंकज चौधरी के इशारे पर आया था, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने उसी क्षण यह जता दिया कि उत्तर प्रदेश में लॉबी, बहाने और इशारों की राजनीति अब नहीं चलेगी।

इस मीटिंग के बाद विधायकों को एक बात साफ हो गई—दिल्ली चाहे जितनी कोशिश कर ले, संगठन चाहे जितना दबाव बनाए, उत्तर प्रदेश में जब तक योगी आदित्यनाथ हैं, तब तक सत्ता का असली केंद्र वही रहेंगे। असल में, यह पूरी लड़ाई मतदाता सूची की आड़ में नेतृत्व की है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कुछ शक्तियां चाहती हैं कि भाजपा की सरकार तो बने, लेकिन सीटें कम आएं, ताकि योगी आदित्यनाथ को कमजोर मुख्यमंत्री साबित कर उन्हें हटाने का रास्ता तैयार किया जा सके। यानी वही पुरानी कहावत—“सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।” यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ SIR को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं। वह जानते हैं कि यह सिर्फ वोटर लिस्ट का खेल नहीं, बल्कि 2027 के बाद उन्हें घेरने की पूरी रणनीति है। इसी बीच RSS पूरी तरह योगी के साथ खड़ा नजर आ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, मोहन भागवत इस वक्त मथुरा में हैं और एक-दो दिन में योगी आदित्यनाथ से बड़ी रणनीतिक बैठक होने वाली है, जिसमें आगे की पूरी रूपरेखा तय होगी। दरअसल, योगी आदित्यनाथ को घेरने की सबसे बड़ी वजह भी यही है कि उनका नाम लगातार राष्ट्रीय राजनीति में उभर रहा है। मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरों में योगी का नाम सबसे मजबूती से लिया जा रहा है, और यही बात दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कई नेताओं की नींद उड़ाए हुए है। कुल मिलाकर, यह वीडियो कॉन्फ्रेंस सिर्फ एक मीटिंग नहीं थी। यह एक चेतावनी थी—विधायकों के लिए भी, मंत्रियों के लिए भी और उन तमाम लॉबियों के लिए भी जो पर्दे के पीछे खेल खेल रही हैं।
स्पष्ट है—जब तक योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में हैं, तब तक “बाबा” का ही चलेगा।

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