कौन हैं सद्गुरु रितेश्वर महाराज? जिन्हें कैसरगंज के पूर्व सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह भी खुले मंच से अपना पिता मानते हैं। जिनकी वाणी से निकला हर शब्द भीड़ को खामोश कर सुनने पर मजबूर कर देता है। गले में रुद्राक्ष, तन पर भगवा वस्त्र और हाथों में वेद लेकिन प्रभाव ऐसा कि वह सीधे लोगों के दिल और दिमाग पर राज करने लगते हैं। जब रितेश्वर महाराज बोलते हैं तो लोग सिर्फ सुनते नहीं, उस विचारधारा में डूबते चले जाते हैं। यही वजह है कि आज गोंडा से लेकर देशभर तक लोग किसी नेता का नहीं, बल्कि रितेश्वर महाराज के नाम का गुणगान करते नजर आ रहे हैं।दरअसल, कैसरगंज से पूर्व सांसद और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह इन दिनों जबरदस्त सुर्खियों में हैं।
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गोंडा स्थित नंदनी निकेतन यूनिवर्सिटी में चल रही आठ दिवसीय राम कथा है। यह राम कथा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि यह आस्था, सत्ता और प्रभाव का ऐसा मंच बन चुकी है जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है।बृजभूषण शरण सिंह को लोग एक जमीनी और दबदबे वाले नेता के रूप में जानते हैं। वह जैसे बोलते हैं, वैसे ही करते हैं“दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा” जैसे जुमले पहले भी वायरल हो चुके हैं। लेकिन इस बार मंच पर कहानी उलट गई। इस बार दबदबे की बात किसी और ने कही और वह थे खुद रितेश्वर महाराज।राम कथा के दौरान रितेश्वर महाराज ने कहा“इस अवध क्षेत्र में, उत्तर प्रदेश में, गोंडा में जब कहा जाता है कि दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा… तो यहां उसका बाप बैठा है। इसका भी दबदबा था, है और रहेगा।”इतना सुनते ही मंच पर बैठे बृजभूषण शरण सिंह भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और वह मंच पर ही अपने गुरु के चरणों में नतमस्तक हो गए। कैमरे चल रहे थे, पंडाल भरा हुआ था और यह दृश्य देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
अब सवाल उठता है आखिर कौन हैं सद्गुरु रितेश्वर महाराज?मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रितेश्वर महाराज का जन्म 5 फरवरी 1973 तिहत्तर को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। बचपन से ही उनमें अद्भुत आध्यात्मिक प्रतिभा देखी जाती थी। कहा जाता है कि उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही अपना उज्ज्वल भविष्य छोड़कर अध्यात्म का मार्ग चुन लिया।रितेश्वर महाराज वृंदावन स्थित आनंद धाम के संस्थापक हैं और अपनी संस्था श्री आनंदम धाम के माध्यम से युवाओं में पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति और सामाजिक चेतना को लेकर अभियान चलाते हैं। वह सिर्फ संत नहीं, बल्कि एक लेखक और विचारक भी हैं।उनकी फैन फॉलोइंग सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। नेपाल, स्कॉटलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसे कई देशों में वह धार्मिक आयोजनों जैसे राधा माधव महोत्सव और गुरु पूर्णिमा महोत्सवमें प्रवचन दे चुके हैं।





