Home Crime कानपुर रेप कांड: रक्षक ही बने भक्षक, कैसे थमेगा अपराध?

कानपुर रेप कांड: रक्षक ही बने भक्षक, कैसे थमेगा अपराध?

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निघासन के बाद अब सचेंडी थाना भी सवालों के घेरे में

लखनऊ। नए साल की शुरुआत में कानपुर जिले के सचेंडी थाना क्षेत्र से सामने आई नाबालिग के साथ गैंगरेप की घटना ने पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि एक नाबालिग लड़की को अगवा कर चलती स्कॉर्पियो कार में उसके साथ दरिंदगी की गई। जांच में सामने आया कि इस जघन्य अपराध में थाने में तैनात पुलिसकर्मी ही शामिल थे, जो रक्षक की भूमिका छोड़ भक्षक बन बैठे।

जांच में बेनकाब हुआ दागी पुलिसकर्मी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान भीमसेन चौकी प्रभारी दरोगा अमित मौर्या की संलिप्तता उजागर हुई। इतना ही नहीं, आरोप है कि शुरुआत में मामले को दबाने की कोशिश की गई और कुछ जिम्मेदार अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई।

लखनऊ तक पहुंची आवाज, तब दर्ज हुआ मुकदमा

जब पीड़ित परिवार की गुहार राजधानी लखनऊ तक पहुंची, तब जाकर हरकत में आए उच्च अधिकारियों ने तत्काल मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बाद सचेंडी थाना प्रभारी विक्रम सिंह को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया, जबकि आरोपी दरोगा अमित मौर्या पर कार्रवाई तेज की गई।

कथित पत्रकार की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस सनसनीखेज कांड में एक कथित पत्रकार की संलिप्तता भी सामने आई है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर जांच करने का दावा कर रही है।

निघासन कांड की याद दिलाता सचेंडी मामला

यह घटना वर्ष 2010 के लखीमपुर-खीरी जिले के निघासन थाना कांड की याद दिलाती है, जहां थाना परिसर में ही मासूम बच्ची की हत्या पुलिसकर्मियों द्वारा की गई थी। सचेंडी की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब रक्षक ही अपराधी बन जाएं, तो कानून-व्यवस्था पर गहरा संकट खड़ा हो जाता है।

इनाम के बाद भी फरार आरोपी दरोगा

गैंगरेप कांड के मुख्य आरोपी दरोगा अमित मौर्या की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश देने का दावा कर रही हैं, लेकिन अब तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

नेटवर्क बना पुलिस के लिए चुनौती

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी दरोगा का मजबूत नेटवर्क उसकी गिरफ्तारी में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। आशंका जताई जा रही है कि वह कहीं सुरक्षित ठिकाने पर छिपकर अदालत में सरेंडर करने की रणनीति बना रहा है। पुलिस अब उसके करीबियों और संभावित मददगारों की भी गहन जांच कर रही है।

पुलिस की छवि पर गहरा दाग

नाबालिग के साथ हुई इस शर्मनाक वारदात ने न केवल कानपुर पुलिस बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की छवि को झकझोर दिया है। सवाल यह है कि जब थाने में तैनात रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

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