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साहित्य भूषण कवि की मांग “हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में मिले मान्यता”

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विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर सीतापुर जनपद के विख्यात कवि एवं राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण कमलेश मौर्य ‘मृदु’ की अध्यक्षता में “सनातन चेतना कवि गोष्ठी” का भव्य आयोजन किया गया। यह कवि गोष्ठी समाजसेवी ललित जोशी के एसबीआई कॉलोनी, जानकीपुरम (लखनऊ) स्थित आवास पर संपन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन बाराबंकी के संदीप अनुरागी ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कमलेश मौर्य ‘मृदु’ ने हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर देते हुए कहा कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में आधिकारिक मान्यता मिलनी चाहिए, क्योंकि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, चेतना और वैश्विक संवाद का सशक्त माध्यम है। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण कविता के माध्यम से समकालीन सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर भी तीखा प्रहार किया और बांग्लादेश की त्रासदी पर मौन साधने वालों की आलोचना की। कवि मृदु की पंक्तियों ने श्रोताओं को गहरे तक झकझोर दिया—
“हम घटेंगे तो कटेंगे ध्यान रखना है हमें,
‘मृदु’ सनातन की बचत का सूत्र इस संदेश में।”

सूर्य कुमार फाउंडेशन के संस्थापक अमित श्रीवास्तव ने भी अपनी रचना के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर दोहरे मानदंडों की आलोचना करते हुए भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
वहीं, विश्व हिंदी दिवस को समर्पित अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए पुवायां (शाहजहांपुर) के कवि विजय तन्हा ने हिंदी की महत्ता और गौरव को शब्दों में पिरोया—
“हमारी आन है हिंदी, हमारी शान है हिंदी,
हमारे हिंद की सबसे बड़ी पहचान है हिंदी।”

कार्यक्रम के संयोजक संदर्भ मौर्य, विधि अधिकारी (भारतीय स्टेट बैंक) ने उपस्थित कवियों एवं साहित्यप्रेमियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर पंजाब नेशनल बैंक में कैशियर श्रीमती रोशनी कुशवाहा ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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