उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ईडी–सीबीआई बनाम सरकार की बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने शनिवार को कोडीन कफ सिरप मामले को लेकर योगी सरकार और केंद्र की एजेंसियों पर सीधा और तीखा हमला बोला।
अखिलेश यादव ने दो टूक सवाल खड़ा किया “कोडीन वाले भाइयों ने 800 करोड़ रुपये जुटा लिए, लेकिन उनके यहां न ईडी जाती है, न सीबीआई। आखिर ये एजेंसियां सिर्फ उन्हीं राज्यों में क्यों सक्रिय हो जाती हैं, जहां चुनाव होने वाले होते हैं?”उनका यह बयान सिर्फ एक आरोप नहीं, बल्कि केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर सीधा कटाक्ष माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कोडीन कफ सिरप जैसे गंभीर और जानलेवा मामले में इतना बड़ा आर्थिक खेल सामने आने के बावजूद रसूखदार लोगों पर हाथ डालने से एजेंसियां कतरा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गरीब, किसान या विपक्षी नेता पर कार्रवाई करनी होती है, तब ईडी-सीबीआई तुरंत हरकत में आ जाती है, लेकिन जब बात बड़े कारोबारियों और कथित “कोडीन वाले भाइयों” की आती है, तो जांच की रफ्तार अचानक धीमी क्यों पड़ जाती है? हालांकि इस पूरे मामले पर योगी सरकार पहले ही अपना पक्ष रख चुकी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 दिसंबर को विधानसभा में जानकारी दी थी कि कोडीन कफ सिरप घोटाले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई है। सीएम योगी के मुताबिक अब तक 79 केस दर्ज किए जा चुके हैं 225 लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं 78 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है 134 कंपनियों पर छापेमारी की गई है 1,000 से ज्यादा सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं,,,सरकार का दावा है कि कार्रवाई लगातार जारी है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
लेकिन अखिलेश यादव का हमला यहीं आकर टिकता है अगर मामला इतना बड़ा है,अगर 800 करोड़ की बात खुद सामने आ रही है, तो फिर ईडी और सीबीआई की एंट्री अब तक क्यों नहीं हुई? क्या वजह है कि केंद्रीय एजेंसियां कुछ मामलों में फुल एक्शन मोड में दिखती हैं और कुछ मामलों में पूरी तरह नदारद? कोडीन कफ सिरप मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक हथियार बनता जा रहा है। एक तरफ सरकार आंकड़ों के दम पर कार्रवाई का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि सवाल सिर्फ कोडीन का नहीं है— सवाल यह है कि कानून सबके लिए बराबर है या नहीं?



