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सीएम योगी का “गोबर गोल्ड मॉडल”: उत्तर प्रदेश में ऊर्जा क्रांति की नई नींव

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश अब रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में तेज़ी से अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच के तहत राज्य में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की रणनीति लागू की जा रही है।

इसका उद्देश्य क्रूड ऑयल और एलपीजी जैसे पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम करना है। इस पहल में गाय के गोबर को ऊर्जा संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे सीधे तौर पर गोपालकों की आमदनी बढ़ेगी।

अब तक यूपी नेडा के तहत राज्य में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 21 से ज्यादा परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि प्रदेश में केवल एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का उपयोग किया जाए, तो पेट्रोलियम उत्पादों पर होने वाला खर्च करीब 500 करोड़ रुपये तक घटाया जा सकता है। इससे विदेशी तेल आयात पर निर्भरता भी कम होगी और राज्य की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

गांवों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल

बाराबंकी में निजी सहभागिता से संचालित सीबीजी प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला जैसे प्रयोग इस मॉडल की सफलता को दर्शाते हैं। गोबर से बायोगैस, बायोगैस से जैव-उर्वरक और जैव-उर्वरक से खेती की उत्पादकता बढ़ने का यह चक्र गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो रहा है। सीएम योगी का यह “गोबर गोल्ड विजन” न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को सतत ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर तेज़ी से आगे बढ़ाएगा।

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