देश की राजनीति में इस वक्त अगर कोई समाज सबसे ज़्यादा सड़कों पर है, तो वह है ब्राह्मण समाज। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की बैठक और मध्य प्रदेश में लगातार जारी आंदोलन इस बात का संकेत है कि समाज खुद को राजनीतिक रूप से उपेक्षित महसूस कर रहा है। मध्य प्रदेश में पिछले 55 दिनों से ब्राह्मण समाज की महिलाएं सड़क पर हैं।
आरोप है कि IAS संतोष वर्मा ने मंच से ब्राह्मण बेटियों को लेकर अभद्र और अशोभनीय टिप्पणी की, लेकिन इसके बावजूद मोहन यादव सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक अधिकारी का बयान नहीं, बल्कि पूरे ब्राह्मण समाज के सम्मान पर हमला है। ब्राह्मण समाज और सवर्ण समाज का आरोप है कि जब वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते हैं, तो धारा 144 लगा दी जाती है ज्ञापन तक देने नहीं दिया जाता बैरिकेडिंग कर पुलिस उन्हें रोकती है लेकिन जिस अधिकारी पर आरोप हैं, उस पर सरकार खामोश बनी हुई है। वही अनिल मिश्रा ने साफ कहा है कि यह लड़ाई सिर्फ ब्राह्मण समाज की नहीं, बल्कि पूरे सवर्ण समाज के स्वाभिमान की है।
भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर के पास एकजुट होकर प्रदर्शनकारियों ने IAS संतोष वर्मा की बर्खास्तगी की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि सरकार बेटी बचाओ का नारा देती है, लेकिन जब ब्राह्मण बेटियों के सम्मान की बात आती है, तो कोई कार्रवाई नहीं होती। उनका साफ संदेश है अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार को इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।यह मामला अब केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहा। यह सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई बन चुका है।अब सवाल यह है कि सरकार इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालती है, या फिर यह आंदोलन आने वाली राजनीति की दिशा तय करेगा।





