हाथरस जिले के विकास को तेज़ करने के लिए सरकार ‘हाथरस अर्बन सेंटर’ यानी ‘नया हाथरस’ बसाने की तैयारी कर रही है। यह नया शहर यमुना एक्सप्रेसवे के पास करीब 4000 हेक्टेयर जमीन पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट लिमिटेड को दी गई है। कंपनी नौ महीने के भीतर 2041 तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत योजना तैयार करेगी।
कम बोली पर मिली जिम्मेदारी
हाथरस अर्बन सेंटर के लिए कई कंपनियों ने आवेदन किया था। जांच के बाद तीन कंपनियां योग्य पाई गईं। इनमें से 1.24 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाने वाली आरवी इंजीनियरिंग को यह काम सौंपा गया।
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आधुनिक तकनीक से बनेगा मास्टर प्लान
यह मास्टर प्लान पूरी तरह जीआईएस तकनीक पर आधारित होगा और केंद्र व राज्य सरकार के सभी नियमों के अनुसार तैयार किया जाएगा। इसमें शामिल होंगे—
- औद्योगिक और व्यापारिक विकास
- भविष्य की आबादी की जरूरतें
- सड़क, बिजली, पानी और सीवरेज व्यवस्था
- हरित क्षेत्र और पर्यावरण संतुलन
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
हाथरस पहले से है औद्योगिक जिला
हाथरस का इतिहास एक व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में रहा है। फिलहाल जिले में 10 हजार से ज्यादा एमएसएमई और कुटीर उद्योग काम कर रहे हैं। यहां कांच की चूड़ियां, घुंघरू, कपड़ा, हस्तशिल्प, कोल्ड स्टोरेज, धातु उद्योग, दाल मिल, आयुर्वेदिक दवाएं, डेयरी और अचार उद्योग प्रमुख हैं।
बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी
नया शहर एनएच-93, यमुना एक्सप्रेसवे और एसएच-33 से जुड़ा होगा। हाथरस जंक्शन पर दो प्रमुख रेल लाइनें मिलती हैं, जिससे यात्रा और व्यापार आसान होगा। हालांकि, अभी जिले में आंतरिक सड़कें, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और मनोरंजन सुविधाओं की कमी है।
रोजगार और आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद
‘नया हाथरस’ परियोजना से इन कमियों को दूर करने की उम्मीद है। इसके पूरा होने से—
- नए उद्योग लगेंगे
- स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा
- आधुनिक शहरी सुविधाएं विकसित होंगी
इससे हाथरस के साथ-साथ आसपास के जिलों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।





