केस से नाम हटाने के बदले मांगी गई थी मोटी रकम, एंटी करप्शन की ट्रैप कार्रवाई में दरोगा और ऑपरेटर धरे गए

वर्दी की आड़ में सौदेबाज़ी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर खाकी की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। बाराबंकी जिले में तैनात एक उपनिरीक्षक और सरकारी कार्यालय से जुड़े कंप्यूटर ऑपरेटर को रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। दोनों पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने एक युवक को आरोपी बनने से बचाने के नाम पर अवैध वसूली की कोशिश की।
पैसे दो, नाम कटेगा— यही था सौदा

पीड़ित युवक किसी आपराधिक मामले में फंसने की आशंका से परेशान था। आरोप है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाकर विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारी और ऑपरेटर ने उससे सीधे पैसों की मांग कर दी। कहा गया कि अगर तय रकम दे दी गई तो कार्रवाई से राहत मिल जाएगी।
शिकायत के बाद बिछा जाल
घूस की मांग से परेशान पीड़ित ने चुप रहने के बजाय एंटी करप्शन टीम का दरवाजा खटखटाया। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने पूरी रणनीति के तहत ट्रैप प्लान किया। तय स्थान पर जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों को पकड़ लिया।
सार्वजनिक स्थान पर हुई कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने भीड़भाड़ वाले इलाके को सुरक्षित मानते हुए वहीं पैसे लेने का फैसला किया था, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि हर कदम पर निगरानी हो रही है। रकम लेते ही एंटी करप्शन टीम ने दोनों को मौके से हिरासत में ले लिया।
पूछताछ और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। एंटी करप्शन विभाग यह भी जांच कर रहा है कि कहीं इससे पहले भी इसी तरह की अवैध वसूली के मामले तो नहीं हुए। संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
बड़ा सवाल
जब कानून का रखवाला ही कानून को बेचने लगे,
तो आम आदमी इंसाफ की उम्मीद किससे करे?



