उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने अनिवार्य CCTV निगरानी नियमों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उद्योग संगठनों ने इस संबंध में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को ज्ञापन सौंपते हुए 24×7 कैमरा निगरानी को अव्यावहारिक और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताया है।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि फैक्ट्रियों में चौबीसों घंटे निगरानी की बाध्यता निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, जो सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 के विपरीत है। उनका तर्क है कि कारोबारी परिसरों में लगातार निगरानी कर्मचारियों और उद्यमियों, दोनों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर असर डालती है।
ज्ञापन में यह भी आपत्ति जताई गई है कि 24 से 48 महीने तक CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की शर्त व्यावहारिक नहीं है। इतनी लंबी अवधि तक डेटा स्टोर करने के लिए टेराबाइट्स में स्टोरेज की आवश्यकता होगी, जिससे साइबर सुरक्षा जोखिम कई गुना बढ़ जाएंगे। उद्योग का कहना है कि रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट डेटा सुरक्षा मानक तय नहीं किए गए हैं।

उद्यमियों ने आशंका जताई है कि बड़े पैमाने पर वीडियो डेटा संग्रहण से हैकिंग, लीक और गलत इस्तेमाल की संभावना बढ़ेगी, जिसकी जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है। इसके साथ ही, महंगे सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और उनके रखरखाव का खर्च छोटे और मझोले निर्माताओं पर भारी आर्थिक बोझ डालेगा।
उद्योग संगठनों का कहना है कि पहले से ही बढ़ते टैक्स और नियामक दबाव झेल रहे छोटे उद्यमों के लिए यह नियम लागत कई गुना बढ़ाने वाला साबित होगा, जिससे रोजगार और उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
पान मसाला और तंबाकू उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने CBIC से मांग की है कि अनिवार्य CCTV नियमों पर पुनर्विचार किया जाए और निगरानी से जुड़े प्रावधानों को व्यावहारिक, संतुलित और संवैधानिक दायरे में लाया जाए।





