देवी सरस्वती को ज्ञान, विद्या, वाणी, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, हर वर्ष माघ मास की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है, इस वर्ष 23 जनवरी को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा।
इस दिन केवल विद्यार्थी और शिक्षक ही नहीं, बल्कि संगीत, कला और ज्ञान से जुड़े सभी लोग मां सरस्वती की विशेष पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।
मौन सृष्टि में मां सरस्वती ने भरी वाणी
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार देवी सरस्वती को भगवान ब्रह्मा की शक्ति और सृष्टि में ज्ञान व वाणी का संचार करने वाली देवी बताया गया है, मान्यता है कि मां सरस्वती के बिना सृष्टि जड़ और मौन है।
वहीं स्कंद पुराण में बसंत ऋतु और बसंत पंचमी को विद्या और सृजन का उत्सव कहा गया है, देवी सरस्वती के प्राकट्य को भी इसी पावन तिथि से जोड़ा जाता है।
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का महत्व
बसंत पंचमी के दिन विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा करने का विशेष महत्व है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से की गई पूजा से बुद्धि तेज होती है
,पढ़ाई में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है, कहा जाता है कि मां सरस्वती की कृपा से मूर्ख व्यक्ति भी विद्वान बन सकता है, खासतौर पर बच्चों की पढ़ाई और वाणी से जुड़ी समस्याओं के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना गया है।
वाणी दोष दूर करने के उपाय
यदि किसी बच्चे को बोलने में कठिनाई है या वाणी दोष की समस्या है, तो बसंत पंचमी के दिन यह सरल उपाय करें:
- बच्चे की जीभ पर चांदी की सलाई या पेन की नोक से केसर की सहायता से ‘ऐं’ लिखें।
- मान्यता है कि इससे वाणी दोष में सुधार आता है और बोलने की क्षमता बेहतर होती है। पढ़ाई में मन न लगे तो करें ये उपाय
अगर बच्चा पढ़ाई में मन नहीं लगाता, तो बसंत पंचमी के दिन ये उपाय लाभकारी हो सकते हैं:
- मां सरस्वती को हरे रंग के फल अर्पित करें।
- बच्चे के स्टडी रूम में मां सरस्वती का चित्र लगाएं।
- पढ़ाई शुरू करने से पहले मां को प्रणाम करने की आदत डालें।
-सरस्वती पूजा के बाद बच्चे की जीभ पर शहद से ॐ बनाना बुद्धि वृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। मां सरस्वती की सरल पूजा विधि
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा इस प्रकार करें:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थान को स्वच्छ करें।
- चौकी पर मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- मां को पीले वस्त्र, पीला चंदन, हल्दी, केसर, पीले फूल और अक्षत अर्पित करें।
- पीले मीठे चावल या मिठाई का भोग लगाएं।
- बच्चों की किताबें और वाद्य यंत्र पूजा स्थल पर रखकर उनकी भी पूजा करें।
- अंत में मां सरस्वती की वंदना, मंत्र और आरती करें।
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से वाणी दोष, पढ़ाई में मन न लगना, और बुद्धि से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं, इस पावन दिन किए गए विशेष उपाय बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में सहायक माने जाते हैं।


