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योगी के नाम पर यूपी में सियासत तेज! यूपी से दिल्ली तक हलचल तेज!

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दिल्ली में खिंची एक लकीर और हिल गया पूरा उत्तर प्रदेश! मोदी–शाह की राजनीति ने यूपी की सत्ता को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर घिरे नजर आ रहे हैं। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ताजपोशी, मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “बॉस” वाला बयान, संगठन बनाम सरकार की खुली लड़ाई, ब्राह्मण विधायकों की मीटिंग और माघ मेले में साधु-संतों का आंदोलन ये सब मिलकर संकेत दे रहे हैं कि 2027 से पहले ही यूपी की राजनीति में बड़ा भूचाल तय है। सवाल बस एक है क्या योगी आदित्यनाथ को ‘साइडलाइन’ करने की स्क्रिप्ट दिल्ली में लिखी जा चुकी है?

नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही यह बहस तेज हो गई है कि क्या मोदी–शाह ने संगठन को सरकार से ऊपर रखने का अंतिम संदेश दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंच से यह कहना “मैं प्रधानमंत्री जरूर हूं, लेकिन मेरे बॉस अब नितिन नवीन हैं” को केवल मज़ाक या शिष्टाचार मानना राजनीतिक रूप से बड़ी भूल होगी।यूपी की राजनीति इसे सीधे-सीधे इस संकेत के तौर पर देख रही है कि अब सरकार संगठन के नीचे चलेगी। वही लाइन जो लंबे समय से अमित शाह और संगठन दोहराते आए हैं “संगठन से बड़ी सरकार नहीं हो सकती” उस पर अब खुद प्रधानमंत्री की मुहर लग गई है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में सभी नेता हाथ जोड़कर खड़े हैं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बिना हाथ जोड़े, सीधे खड़े नजर आते हैं।जिसको लेकर भी खूब बयानबाजी हो रही है राजनीतिक गलियारों में इसे यूं पढ़ा जा रहा है: योगी न झुकते हैं,न दबते हैं,और न डरते हैं लेकिन यही “अलग स्टैंड” अब उनके लिए परेशानी भी बनता दिख रहा है। यूपी में पहले से ही पंकज चौधरी और योगी आदित्यनाथ के बीच तनातनी की खबरें थीं।

अब दिल्ली के संकेतों के बाद चर्चा है कि:प्रदेश अध्यक्ष मतलब सत्ता का असली केंद्र,,कुलमिलाकर केशव मौर्य की बातें सच साबित होती हुई नजर आ रही है संगठन सरकार से बड़ी होती है। यानी आने वाले दिनों में पंकज चौधरी योगी सरकार के ‘बॉस’ की भूमिका में नजर आ सकते हैं। यही वजह है कि पार्टी के कई विधायक और मंत्री तेजी से संगठन के खेमे में शिफ्ट होते दिख रहे हैं। यूपी के ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक, जो कथित तौर पर योगी आदित्यनाथ के समर्थन में थी, दिल्ली को बिल्कुल पसंद नहीं आई। इसके बाद घटनाक्रम तेज हो गया,,भाजपा विधायक पी.एन. पाठक को दिल्ली तलब किया गया प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से सीधी मुलाकात बैठक के एजेंडे, मकसद और संदेश पर सवाल साफ चेतावनी आगे से ऐसी बैठकें बर्दाश्त नहीं होंगी सूत्रों के मुताबिक, संगठन ने यह भी कह दिया कि दोबारा ऐसा हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।

यानी योगी समर्थक खेमे पर सीधा प्रहार।इधर प्रयागराज के माघ मेले में हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद खुले तौर पर धरने पर बैठ गए हैं और आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके शिष्यों पर लाठीचार्ज किया सरकार साधु-संतों का अपमान कर रही है योगी सरकार का रुख साफ है माफी नहीं मांगी जाएगी। लेकिन विपक्ष को यहीं मुद्दा मिल गया। योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत रही है उनकी हिंदुत्व की छवि। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि साधु-संत असुरक्षित हैं संतों को पीटा जा रहा है,,हिंदुओं की सरकार में ही हिंदू संत सड़क पर हैं,,सोशल मीडिया पर भी एक संगठित लॉबी योगी के खिलाफ सक्रिय दिख रही है। यानी हमला सीधे उनकी कोर स्ट्रेंथ पर है। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि दिल्ली लॉबी,,गुजरात लॉबी,,और यूपी के भीतर कुछ असंतुष्ट चेहरे मिलकर योगी आदित्यनाथ को पूरी तरह घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। RSS अब तक चुप है, लेकिन कहा जा रहा है कि अगर योगी के साथ कोई मजबूती से खड़ा है तो वह RSS और कुछ क्षत्रिय-ब्राह्मण चेहरे हैं।अब इस पूरी खबर का निष्कर्ष क्या है तो वो भी आप जान लीजिये योगी आदित्यनाथ को गिराने की तैयारी है या उन्हें सीमित करने की? यह अभी साफ नहीं है।लेकिन इतना तय है कि दिल्ली से संकेत मिल चुका है संगठन एक्टिव मोड में है,,योगी की छवि पर चौतरफा वार शुरू हो चुका है जैसे-जैसे 2027 नजदीक आएगा,यूपी की राजनीति में और बड़े खुलासे, और तीखे टकराव देखने को मिलेंगे। यह सिर्फ शुरुआत है असली खेल अभी बाकी है।

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