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माघ मेले में आस्था का महासागर, 2.90 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी

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प्रयागराज में संगम की रेती पर सजे माघ मेले में बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धा का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई। प्रशासन के अनुसार, वीकेंड और आगामी अवकाशों को देखते हुए अगले तीन दिनों में साढ़े तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान है।

23 जनवरी को माघ मेले का चौथा प्रमुख स्नान पर्व है। बसंत पंचमी के दिन सुबह से ही संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। पीले वस्त्र धारण किए संत-महात्मा और श्रद्धालु गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम में पुण्य स्नान करते नजर आए। सुबह 8 बजे तक 1.04 करोड़ से अधिक लोग स्नान कर चुके थे, जबकि दोपहर 2 बजे तक यह आंकड़ा 2.90 करोड़ पार कर गया, जो तीन करोड़ से ऊपर जाने की संभावना है।

नेटवर्क व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त

माघ मेला क्षेत्र में इंटरनेट और कॉलिंग सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। श्रद्धालुओं को परिजनों से संपर्क के लिए मेला क्षेत्र से बाहर जाना पड़ रहा है। अस्थायी टावर लगाए जाने के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं, मुख्य स्नान पर्व पर नेटवर्क लगभग शून्य है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ी

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तबीयत बिगड़ गई है। मौनी अमावस्या के बाद से वे मेला प्रशासन से सम्मानपूर्वक स्नान कराए जाने की मांग को लेकर शिविर के बाहर डटे हुए हैं। बुखार आने के बाद वे कुछ समय के लिए वैनिटी वैन में गए, हालांकि अब फिर शिविर के बाहर पालकी पर बैठे हैं। स्वास्थ्य कारणों से आज गौ प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा भी स्थगित कर दी गई।

किन्नर अखाड़े की भव्य उपस्थिति

बसंत पंचमी के मुख्य स्नान पर्व पर सनातनी किन्नर अखाड़े ने नागा संन्यासियों के साथ संगम में स्नान किया। अखाड़े की शोभायात्रा और नागा साधुओं के करतब श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने।

विवाद पर पुरी शंकराचार्य का बयान

पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि प्रशासन द्वारा व्यवस्थाएं सराहनीय हैं और किसी को स्नान से नहीं रोका गया, केवल तामझाम को नियंत्रित किया गया होगा।

मानवाधिकार आयोग का संज्ञान

मौनी अमावस्या के दौरान हुए विवाद को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग ने पुलिस की कथित अमानवीय कार्रवाई पर संज्ञान लिया है। प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यह शिकायत इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव द्वारा दर्ज कराई गई थी।

सुरक्षा और निगरानी के कड़े इंतजाम

800 हेक्टेयर में फैले माघ मेले को 7 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे घाट, 9 पांटून पुल, 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और AI आधारित निगरानी प्रणाली तैनात है। जल पुलिस, NDRF, SDRF, PAC, ATS और STF की टीमें सुरक्षा में मुस्तैद हैं। ड्रोन से पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है।माघ मेला 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा, जहां आस्था, सुरक्षा और व्यवस्था का यह विराट संगम लगातार इतिहास रचता नजर आ रहा है।

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