महाराष्ट्र की राजनीति से एक बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। लैंडिंग से ठीक पहले विमान के क्रैश होने से यह हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अजित पवार—एक ऐसा नाम जिसने 46 वर्षों तक महाराष्ट्र की राजनीति को दिशा दी, सत्ता और संघर्ष दोनों का सामना किया और कई बार इतिहास रचा। आज हम आपको बताएंगे—कौन थे अजीत पवार और कैसा रहा उनका सियासी सफर।
महाराष्ट्र की राजनीति का एक ऐसा चेहरा, जो सहकारिता से सत्ता के शीर्ष तक पहुंचा। एक मजबूत प्रशासक, तेज फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले नेता और बारामती की राजनीति की धुरी। अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ। राजनीति में उनकी शुरुआत साल 1982 में सहकारिता आंदोलन से हुई। यहीं से उन्होंने जनता से जुड़ना और जमीनी राजनीति सीखनी शुरू की।
1991 में अजीत पवार पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने। इसी साल उन्होंने पहली बार बारामती से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में कदम रखा। इसके बाद उनका सियासी कद लगातार बढ़ता चला गया। 1995 में पहली बार बारामती से विधायक बनने के बाद अजित पवार ने इस सीट को अपनी सियासी पहचान बना लिया। अजीत पवार 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 में लगातार बारामती से विधायक चुने गए। बारामती उनके लिए सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि सत्ता का मजबूत गढ़ बन गई।
अपने लंबे राजनीतिक करियर में अजीत पवार कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभालते रहे—जिसमे 1991 में ऊर्जा राज्यमंत्री, 1992 में मृदा संरक्षण और बिजली योजना मंत्री, 1999 में सिंचाई कैबिनेट मंत्री, 2003 में ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री, और 2009 में जल संसाधन व ऊर्जा मंत्री। इसके बाद आया साल 2010 ज़ब अजीत पवार पहली बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। 2012 में दोबारा उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उन्होंने सत्ता के केंद्र में रहते हुए सरकार के कई अहम फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाई।
23 नवंबर 2019महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ। ज़ब एनसीपी में टूट के बाद अजित पवार कुछ विधायकों के साथ अलग गुट बनाकर बीजेपी और शिवसेना के समर्थन से सरकार में शामिल हुए। हालांकि यह सरकार सिर्फ 80 घंटे ही चल पाई, लेकिन इस घटना ने अजीत पवार को देश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना दिया था।
सरकार गिरने के बाद 2022–2023 में अजीत पवार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बने।
इसके बाद 2023 में एनसीपी में एक बार फिर टूट हुई। अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ बीजेपी-शिवसेना के NDA गठबंधन में शामिल हुए और एक बार फिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने।
5 दिसंबर 2024 से 28 जनवरी 2026 तक अजित पवार उपमुख्यमंत्री पद पर बने रहे। लेकिन 28 जनवरी 2026 को विमान की लैंडिंग से पहले हुए भीषण हादसे में उनका असामयिक निधन हो गया। अजीत पवार की 46 वर्षों की राजनीतिक पारी उतार-चढ़ाव, विवाद, सत्ता और संघर्ष से भरी रही।


