उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में कुल 8 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सतपाल महाराज और सुबोध उनियाल भी उपस्थित रहे। कैबिनेट के फैसलों में स्वास्थ्य, राजस्व, जनजाति कल्याण, भू-जल संरक्षण, शिक्षा, रक्षा, उद्योग और ग्रीन हाइड्रोजन नीति से जुड़े अहम निर्णय शामिल हैं, जिनसे राज्य के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत उन स्वास्थ्य कर्मियों को राहत दी है, जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष पूरी हो चुकी है। अब ऐसे कर्मचारी आपसी सहमति से जिलों में स्थानांतरण का लाभ ले सकेंगे।
राजस्व विभाग में आपसी समझौते के आधार पर भूमि अर्जन की नई व्यवस्था को लागू किया गया है। इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी होगी। जनजाति कल्याण विभाग में नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। साथ ही पूर्व की नियमावली में संशोधन कर व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
भू-जल संरक्षण के लिए नई नियमावली भू-जल के अनियंत्रित दोहन को रोकने के लिए नई नियमावली को स्वीकृति दी गई है। व्यावसायिक उपयोग के लिए दरें तय की गई हैं और रजिस्ट्रेशन फीस 5,000 रुपये निर्धारित की गई है।
कैबिनेट ने जीआरडी उत्तराखंड विश्वविद्यालय को मान्यता देने की अनुमति प्रदान की। इसके अलावा चिन्यालीसौड़ और गोचर की हवाई पट्टियों को रक्षा मंत्रालय को ट्रांसफर करने का निर्णय लिया गया। उधम सिंह नगर स्थित पराग फर्म की भूमि, जो पहले सिडकुल को दी गई थी, अब सिडकुल को उस भूमि को सब-लीज पर देने की अनुमति मिल गई है।
कैबिनेट ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत हरित नीति को मंजूरी दे दी है। सब्सिडी से जुड़े मामलों के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे।
कैबिनेट के इन फैसलों से राज्य में विकास, निवेश, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।





