नोटिस जारी होने पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जताया कड़ा एतराज़
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में स्थित मजारों को हटाने के लिए जारी किए गए नोटिस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस कार्रवाई के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने तीखा विरोध दर्ज कराते हुए इसे धार्मिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।
मौलाना महमूद मदनी ने कार्रवाई को बताया असंवैधानिक
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने KGMU प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि
“बिना कानूनी प्रक्रिया और वक्फ नियमों के किसी धार्मिक स्थल को हटाने का नोटिस असंवैधानिक है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है।
वक्फ कानूनों की अनदेखी का आरोप
मौलाना मदनी ने कहा कि जिन मजारों को हटाने के नोटिस दिए गए हैं, वे वक्फ संपत्तियों के अंतर्गत आती हैं। ऐसे में वक्फ अधिनियम और निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी कर किसी भी तरह की कार्रवाई करना कानूनन गलत है।
सभी ध्वस्तीकरण नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने KGMU प्रशासन से सभी जारी नोटिस तत्काल वापस लेने,और किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाने
की मांग की है।
प्रशासन को दी सख्त चेतावनी
मौलाना महमूद मदनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि नोटिस वापस नहीं लिए गए, तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद कानूनी विकल्पों पर विचार करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और कानून का पालन अनिवार्य है।
धार्मिक अधिकारों को लेकर बढ़ी चिंता
इस पूरे मामले ने धार्मिक अधिकारों और प्रशासनिक निर्णयों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें KGMU प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।





