यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। कोर्ट का फैसला आते ही भीम आर्मी और चंद्रशेखर आज़ाद रावण की बेचैनी खुलकर सामने आने लगी है—बयानों में धमकी, सड़कों पर प्रदर्शन और टकराव की खुली चेतावनी।
पहले चंद्रशेखर आज़ाद रावण ने कहा कि “अगर 15 फीसदी के दबाव में यूजीसी वापस हुआ तो 85 फीसदी लोग सड़कों पर उतरकर मुंहतोड़ जवाब देंगे” और अब भीम आर्मी खुद मैदान में उतर चुकी है। बरेली में भीम आर्मी का ज़ोरदार प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन और इस्तीफा दे चुके सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री पर जातिवादी मानसिकता के आरोप—ये साफ संकेत दे रहे हैं कि यूजीसी अब सिर्फ एक कानूनी मसला नहीं रहा।
एक तरफ ब्राह्मण-क्षत्रिय और करणी सेना जैसे सवर्ण संगठनों का बड़ा आंदोलन, जिसके दबाव में कोर्ट ने कानून पर रोक लगाई, और दूसरी तरफ भीम आर्मी व रावण की खुली हुंकार—यानी यूजीसी अब सवर्ण बनाम दलित राजनीति की सीधी टकराहट का अखाड़ा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह सियासी संघर्ष और तेज़ होने के आसार साफ दिखाई दे रहे हैं।


