उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों तेज रफ्तार पर है। मंत्रिमंडल विस्तार और भाजपा प्रदेश संगठन में संभावित बदलावों की चर्चाओं के बीच लखनऊ में एक अहम बैठक हुई, इस बैठक में सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के बीच बेहतर तालमेल पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए।
बैठक का उद्देश्य क्या था?
बैठक लखनऊ के निराला नगर स्थित संघ कार्यालय ‘सरस्वती कुंज’ में आयोजित की गई, इसका मुख्य मकसद तीनों पक्षों सरकार, संगठन और संघ के बीच समन्वय को और मजबूत करना था, सूत्रों के अनुसार, बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों की समीक्षा की गई और आने वाले आयोजनों की रूपरेखा पर चर्चा हुई, साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक मजबूती और जमीनी तैयारी पर जोर दिया गया।
बैठक का फोकस था:
- सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाना
- भाजपा संगठन का विस्तार
- समाज के हर वर्ग से संवाद बढ़ाना
- चुनावी रणनीति की शुरुआती तैयारी कौन-कौन रहा मौजूद?
बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा प्रदेश अध्यक्ष, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी और संघ के क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए। विभिन्न आनुषंगिक संगठनों के प्रांतीय और क्षेत्रीय पदाधिकारियों ने भी अपने-अपने कार्यक्रमों की जानकारी साझा की बताया जा रहा है कि सभी ने अपने स्तर पर चल रहे अभियानों और आगामी योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
क्या बने प्रमुख निर्णय?
बैठक में सहमति बनी कि:
- संघ, सरकार और भाजपा के कार्यक्रमों में बेहतर समन्वय रखा जाएगा।
- घर-घर संपर्क अभियान चलाकर लोगों से सीधा संवाद किया जाएगा।
- सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनसंपर्क बढ़ाया जाएगा।
- संगठन विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र अभी से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर बल दिया गया।
संगठन विस्तार और संतुलन पर जोर
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि प्रदेश संगठन का विस्तार जल्द किया जाए नए पदाधिकारियों की नियुक्ति में सभी समुदायों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर विचार हुआ, माना जा रहा है कि संगठन में संतुलन और नई ऊर्जा लाने से पार्टी को आगामी चुनावों में मजबूती मिल सकती है।
मोहन भागवत का लखनऊ दौरा
बैठक के बाद खबर है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत का लखनऊ दौरा प्रस्तावित है। राजनीतिक हलकों में इसे 2027 की रणनीति और समन्वय से जोड़कर देखा जा रहा है, हाल के महीनों में उनका यह दूसरा दौरा बताया जा रहा है, जिससे प्रदेश की सियासत और गर्म हो गई है।
स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव भले ही दूर हों, लेकिन तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है सरकार, संगठन और संघ के बीच समन्वय बैठकों का सिलसिला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव को लेकर और बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।




