क्या अमेरिका अब भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश कर रहा है? क्या 100 साल पुराने RSS और भारत की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी RAW पर सच में बैन लग सकता है? और अगर ऐसा हुआ तो क्या भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार आ सकती है? दरअसल अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की एक रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन से सिफारिश की गई है कि भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खुफिया एजेंसी RAW पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाए। USCIRF एक अमेरिकी सरकारी सलाहकार निकाय है जो दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर रिपोर्ट देता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह केवल सिफारिश करता है, फैसला अमेरिकी सरकार लेती है और उसकी सिफारिश मानना जरूरी नहीं होता।
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रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंता है और इसी आधार पर RSS और RAW के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार संभावित कदमों में शामिल हो सकते हैं– RSS से जुड़े लोगों के अमेरिका आने पर रोक – अमेरिका में अगर कोई संपत्ति हो तो उसे फ्रीज करना – भारत को हथियारों की बिक्री पर शर्तें लगाना – भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ना,,,सबसे बड़ा सवाल यही है। इसका सीधा जवाब है – नहीं, क्योंकि – USCIRF भारत की संस्था नहीं है – उसे भारत में किसी संगठन को बैन करने का अधिकार नहीं है – RSS को बैन करने का अधिकार सिर्फ भारत सरकार और भारतीय कानून के पास है – अभी भारत में RSS पर बैन का कोई सवाल ही नहीं उठ रहा यानी यह सिर्फ अमेरिका के अंदर संभावित प्रतिबंधों की बात है, भारत के अंदर RSS के काम पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। भारत सरकार पहले भी USCIRF की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण बताकर खारिज करती रही है। कई बार भारत ने इस आयोग की आलोचना करते हुए कहा है कि यह अधूरी जानकारी और राजनीतिक नजरिए से रिपोर्ट तैयार करता है। राजनीतिक मायने क्या हैं? विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की रिपोर्टें अक्सर कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी होती हैं। हालांकि भारत और अमेरिका के मजबूत रणनीतिक रिश्तों को देखते हुए ऐसे कठोर कदम उठने की संभावना कम मानी जाती है। फिलहाल RSS या RAW पर भारत में किसी भी तरह के प्रतिबंध की कोई संभावना नहीं है। USCIRF की रिपोर्ट सिर्फ एक सिफारिश है, कोई कानूनी आदेश नहीं। लेकिन इस रिपोर्ट ने एक बार फिर भारत-अमेरिका रिश्तों और धार्मिक स्वतंत्रता की बहस को जरूर गरमा दिया है। अब देखना होगा कि अमेरिका की सरकार इस सिफारिश पर क्या रुख अपनाती है


