Home Political news चंद्र शेखर रावण का ऐलान ! 27 में इस पार्टी करेंगे गठबंधन

चंद्र शेखर रावण का ऐलान ! 27 में इस पार्टी करेंगे गठबंधन

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अभी से तेज होती दिखाई दे रही है। जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं। इसी बीच नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने एक बड़ा राजनीतिक ऐलान करके यूपी की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

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बाराबंकी के हैदरगढ़ में पार्टी के स्थापना दिवस और कांशीराम जयंती के मौके पर आयोजित एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने साफ तौर पर कहा कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर किसी भी अन्य राजनीतिक दल के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के साथ उनके वैचारिक मतभेद इतने गहरे हैं कि उनके साथ किसी भी प्रकार का राजनीतिक समझौता संभव नहीं है। अपने भाषण के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने विपक्षी दलों को एकजुट होने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर सभी विपक्षी पार्टियां एक साथ आ जाएं तो 2027 के चुनाव में बीजेपी को कड़ी चुनौती दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि एकजुट होकर मुकाबला करने की जरूरत है। उनका कहना था कि अगर सभी दल मिलकर चुनाव लड़ें तो मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाया जा सकता है। चंद्रशेखर आजाद ने अपने संबोधन में बहुजन समाज, पिछड़े वर्गों और अन्य वंचित तबकों से भी एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई सिर्फ सत्ता पाने की नहीं बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और बराबरी के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि अगर समाज के कमजोर वर्ग एक मंच पर आ जाएं तो राजनीतिक तस्वीर बदली जा सकती है।

सभा के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार पर भी तीखा हमला बोला। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि अपराध रोकने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी बताते हैं। योगी आदित्यनाथ के उस बयान का जिक्र करते हुए जिसमें उन्होंने अपराधियों के लिए हर गली में “यमराज” खड़े होने की बात कही थी, चंद्रशेखर ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी से जुड़े अपराधी तो यमराज को भी छुट्टी पर भेज देते हैं। उन्होंने संभल और जौनपुर जैसी घटनाओं का उदाहरण देते हुए सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि सरकार अपराध रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है। साथ ही उन्होंने अपने ऊपर हुए हमलों और मिली धमकियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके काफिले पर पथराव किया गया और उन्हें डराने की कोशिश की गई, लेकिन वह डरने वाले नहीं हैं।अपने खास अंदाज में उन्होंने कहा कि उनका नाम चंद्रशेखर आजाद है और वह संघर्ष से पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का संविधान खड़ा है और उसी की ताकत से वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। चंद्रशेखर आजाद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी एकता को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। उनके इस बयान को 2027 के चुनाव से पहले संभावित महागठबंधन की एक कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर विपक्ष एकजुट होता है तो चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो सकता है, लेकिन अगर विपक्ष बिखरा रहा तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि चंद्रशेखर आजाद ने 2027 के चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति के संकेत दे दिए हैं। अब देखना यह होगा कि उनके इस प्रस्ताव पर अन्य विपक्षी दल क्या रुख अपनाते हैं और क्या वाकई यूपी में कोई बड़ा राजनीतिक गठबंधन बनता है या नहीं। आने वाले समय में यूपी की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक विपक्षी एकता और चुनावी समीकरणों पर निर्भर करेगा।

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