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सीएम योगी ने राजस्थान की धरती से भरी हुंकार ! हिन्दुओ को बाटने वालों से रहना होगा सावधान !

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त एक खामोश जंग चल रही है. एक तरफ जातियों में हिंदुओं को बांटने की राजनीति हो रही है. कोई कुर्मी वोट मांग रहा है, कोई निषाद वोट, कोई राजभर वोट तो कोई बहुजन वोट बैंक मजबूत करने में लगा है। लेकिन इसी सियासी शोर के बीच एक भगवाधारी नेता ऐसा भी है जो जाति नहीं बल्कि पूरे हिंदू समाज को एकजुट करने की बात कर रहा है ,नाम है योगी आदित्यनाथ। कहा जाता है जब हिंदू बंटता है तभी दुश्मन मजबूत होता है… और शायद यही वजह है कि योगी लगातार सनातन और राष्ट्र की बात कर रहे हैं।अब सवाल ये है… क्या योगी की हिंदू एकता की राजनीति जातीय समीकरणों पर भारी पड़ेगी? क्या यही वजह है कि योगी लगातार विरोधियों के निशाने पर हैं? और क्या योगी का बढ़ता कद किसी बड़ी सियासी बदलाव का संकेत है.

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उत्तर प्रदेश की राजनीति इस वक्त एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां एक तरफ जातीय राजनीति अपने चरम पर है। हर नेता अपनी जाति का सबसे बड़ा ठेकेदार बनने की होड़ में लगा है। कोई कुर्मी समाज की बात कर रहा है, कोई निषाद समाज की, कोई राजभर समाज की तो कोई बहुजन राजनीति के नाम पर अपनी सियासी जमीन तैयार कर रहा है। लेकिन इन सबके बीच एक चेहरा ऐसा भी है जो जाति की नहीं बल्कि पूरे हिंदू समाज को एकजुट करने की बात करता है… वो नाम है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। योगी आदित्यनाथ का साफ मानना है कि जब-जब हिंदू बंटा है तब-तब देश कमजोर हुआ है। इतिहास इसका गवाह है। मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक अगर किसी ने भारत पर राज किया तो उसकी सबसे बड़ी वजह हमारी आपसी फूट थी। और शायद यही वजह है कि आज योगी आदित्यनाथ जातीय राजनीति से ऊपर उठकर सनातन और राष्ट्रवाद की बात करते हैं। योगी की राजनीति का केंद्र जाति नहीं बल्कि हिंदुत्व और विकास को माना जाता है। जहां एक तरफ अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद, ओमप्रकाश राजभर और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेता अपने-अपने समाज की राजनीति को आगे बढ़ाते नजर आते हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ हिंदू एकता की बात करते दिखाई देते हैं। हाल ही में बहुजन समाज की राजनीति करने वाले चंद्रशेखर आजाद ने बाराबंकी में बयान दिया कि बहुजन समाज को सिर्फ बहुजन को ही वोट देना चाहिए। इस बयान के बाद सियासत गरमा गई और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या यह सामाजिक न्याय की राजनीति है या फिर समाज को और ज्यादा बांटने की रणनीति? इतना ही नहीं अगर चंद्रशेखर आजाद के सोशल मीडिया पोस्ट देखें तो कई बार वह ईश्वर की बजाय “प्रकृति से कामना” करने की बात लिखते हैं। उनके विरोधी इसे सनातन परंपरा से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में भी देखते हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति जातीय ध्रुवीकरण की तरफ बढ़ रही है? इसी बीच योगी आदित्यनाथ का राजस्थान दौरा भी काफी चर्चा में रहा। वीरों की धरती राजस्थान के जालौर में श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित धर्मसभा में योगी की गर्जना ने सियासी हलचल तेज कर दी। अपने भाषण में योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि जब समाज बंटता है तभी आक्रांता हावी होते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में जब भी आक्रमणकारी आए उन्होंने सिर्फ देश की संपत्ति ही नहीं लूटी बल्कि हमारी आस्था, मंदिरों और माताओं-बहनों की सुरक्षा पर भी हमला किया।

योगी ने कहा कि आक्रांता इतने मजबूत नहीं थे जितना हम कमजोर थे क्योंकि हम बंटे हुए थे। अगर समाज एकजुट होता तो कोई भी ताकत भारत की तरफ आंख उठाकर नहीं देख सकती थी। योगी का यह संदेश साफ था – एकता ही सुरक्षा की गारंटी है। इसी कार्यक्रम के बाद लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की। राजनाथ सिंह ने कहा कि योगी एक ऐसे भगवाधारी नेता हैं जो कभी अपना रंग नहीं बदलते। उनके लिए राष्ट्र और सनातन सर्वोपरि है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता अब सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि दूसरे राज्यों में भी उनकी मांग बढ़ रही है। योगी के समर्थक तो यहां तक कहते हैं कि अगर देश में योगी जैसे सख्त नेता नहीं होंगे तो हिंदुओं की स्थिति वैसी भी हो सकती है जैसी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की बताई जाती है। हालांकि विपक्ष इस नैरेटिव से सहमत नहीं है और योगी की राजनीति को ध्रुवीकरण की राजनीति बताता है। लेकिन इन आरोपों के बीच भी योगी की लोकप्रियता कम नहीं हुई बल्कि लगातार बढ़ती ही दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या उत्तर प्रदेश में जातीय राजनीति और हिंदुत्व की राजनीति के बीच सीधा मुकाबला बनने जा रहा है? क्या योगी आदित्यनाथ का हिंदू एकता का फॉर्मूला जातीय समीकरणों पर भारी पड़ेगा? और क्या योगी आदित्यनाथ आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का और बड़ा चेहरा बन सकते हैं? फिलहाल इतना तो साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय में जाति बनाम हिंदुत्व का यह संघर्ष और तेज होने वाला है… और इस संघर्ष के केंद्र में अगर कोई चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में है… तो वह नाम है योगी आदित्यनाथ का

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