इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर में गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के रिश्ते के भाई की संपत्ति कुर्क करने का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकार यह साबित नहीं कर पाई कि इस संपत्ति का किसी अपराध से कोई संबंध है।
मामले में मंसूर अंसारी की अपील को स्वीकार करते हुए जस्टिस राजबीर सिंह ने कहा कि सिर्फ किसी व्यक्ति का किसी गैंगस्टर से रिश्ता होना, उसकी संपत्ति जब्त करने का आधार नहीं बन सकता।
पहले क्या हुआ था?
इससे पहले गाजीपुर की अदालत ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर यह मान लिया था कि यह संपत्ति मुख्तार अंसारी की बेनामी संपत्ति है। इसके बाद करीब 26 लाख रुपये की दुकानें और भवन कुर्क करने के जिलाधिकारी के फैसले को सही ठहराया गया था।
Also Read- कालाबाजारी पर मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई, 5813 जगहों पर पड़े छापे
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी के पास संपत्ति कुर्क करने की शक्ति असीमित नहीं है। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि संपत्ति अपराध से कमाई गई है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के आपराधिक मामले से जुड़ने भर से उसकी संपत्ति कुर्क नहीं की जा सकती, जब तक यह साबित न हो कि वह संपत्ति अपराध से हासिल की गई है।
मंसूर अंसारी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
अदालत ने पाया कि मंसूर अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। 2007 में मुख्तार अंसारी के खिलाफ एक केस जरूर था, लेकिन उसमें मंसूर अंसारी आरोपी नहीं थे।
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर किसी की संपत्ति जब्त नहीं की जा सकती।
संपत्ति तुरंत छोड़ने का आदेश
12 मार्च को दिए अपने फैसले में हाईकोर्ट ने गाजीपुर कोर्ट और जिलाधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित संपत्ति को तुरंत मुक्त किया जाए।





