उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांशीराम जयंती को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ये दल केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए बसपा और उसके महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कांशीराम को भारत रत्न न देने पर कांग्रेस पर सवाल
मायावती ने कहा कि जब कांग्रेस केंद्र की सत्ता में थी, तब उसने बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने का निर्णय क्यों नहीं लिया। उनका कहना है कि अब जब कांग्रेस सत्ता में नहीं है, तो वह दूसरी सरकार से भारत रत्न देने की मांग कर रही है, जो केवल राजनीतिक दिखावा है।
बिना नाम लिए चंद्रशेखर आजाद पर भी निशाना
बसपा प्रमुख ने बिना नाम लिए नगीना से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद पर भी निशाना साधा, हाल ही में चंद्रशेखर आजाद ने कांशीराम जयंती के अवसर पर बाराबंकी में एक बड़ी रैली आयोजित की थी, जिसके बाद यह सियासी बयान सामने आया।
बसपा को खत्म करने की साजिश का आरोप
मायावती का कहना है कि सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां शुरू से ही बसपा को कमजोर करने की कोशिश करती रही हैं, उन्होंने कहा कि बसपा कोई साधारण पार्टी नहीं बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, जिसकी नींव खुद कांशीराम ने रखी थी, मायावती ने स्पष्ट कहा कि उनके जीते-जी कोई भी इस पार्टी को कमजोर नहीं कर सकता।
‘दोगला चाल और चरित्र’ का आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि जब कांशीराम जीवित थे, तब इन दलों ने उनकी उपेक्षा की, लेकिन अब चुनाव के समय वही पार्टियां उनके नाम का इस्तेमाल कर रही हैं, उन्होंने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि बसपा सरकार के दौरान कांशीराम के सम्मान में किए गए कई कार्यों को बाद में बदल दिया गया।
‘चमचा युग’ किताब का जिक्र
बसपा सुप्रीमो ने कांशीराम द्वारा लिखी किताब The Chamcha Age का जिक्र करते हुए कहा कि यह किताब ऐसे लोगों से दूरी बनाने की चेतावनी देती है जो दलित समाज के नाम पर राजनीति करते हैं, उन्होंने विपक्षी दलों के साथ खड़े दलित नेताओं पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सपा और कांग्रेस के “दलित चमचे” इस मुद्दे पर चुप रहें तो उनके लिए बेहतर होगा।
दलित समाज को दी चेतावनी
मायावती ने दलित समाज से अपील करते हुए कहा कि उन्हें इन पार्टियों के चुनावी हथकंडों से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि इनका असली उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना है।






