2027 विधानसभा चुनाव से पहले सहयोगी दलों की सक्रियता ने बीजेपी के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर दी है । मायावती, चंद्रशेखर आजाद और अखिलेश यादव के हमलों के बीच अब बीजेपी के सहयोगी और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में हैं। गोरखपुर से शुरू होने जा रहा उनका शक्ति प्रदर्शन न सिर्फ निषाद समाज की एकजुटता का संदेश देगा बल्कि बीजेपी के साथ सीट बंटवारे की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। माना जा रहा है कि इन रैलियों के जरिए संजय निषाद अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर 2027 में ज्यादा हिस्सेदारी का दबाव बना सकते हैं।
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निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने पार्टी विस्तार और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर चार बड़ी रैलियां करने का ऐलान किया है। इस अभियान की शुरुआत 22 मार्च 2026 को गोरखपुर से होगी, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद भी है। महंत दिग्विजय नाथ पार्क में आयोजित होने वाली इस रैली को पार्टी शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रही है।
संजय निषाद ने सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यकर्ताओं और निषाद समाज के लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज अब अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आगे बढ़ रहा है और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का समय आ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन रैलियों के जरिए संजय निषाद बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं ताकि 2027 चुनाव में निषाद पार्टी को ज्यादा सीटें मिल सकें। हालांकि फिलहाल निषाद पार्टी एनडीए का हिस्सा है, लेकिन इस शक्ति प्रदर्शन को भविष्य की राजनीतिक सौदेबाजी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि संजय निषाद की यह रैलियां सिर्फ संगठन मजबूत करने तक सीमित रहती हैं या यूपी की सियासत में नए समीकरण भी बनाती हैं।






