अयोध्या से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने उन तमाम दावों और आरोपों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया जो अक्सर सनातन धर्म को बांटने के लिए लगाए जाते हैं। जो लोग यह कहते हैं कि दलितों को मंदिरों में प्रवेश नहीं मिलता, जो यह नैरेटिव गढ़ते हैं कि सदियों से उन्हें भगवान से दूर रखा गया, जो लोग खड़े होकर भगवान व ब्राह्मणों को गाली देते है उनके लिए अयोध्या का यह दृश्य एक बड़ा जवाब बनकर सामने आया।देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या पहुंचीं और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना की।
इस गौरवपूर्ण क्षण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे और पूरा परिसर जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। यह सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया।द्रौपदी मुर्मू का व्यक्तित्व खुद भारत की सामाजिक विविधता की कहानी कहता है। वह जिस समाज से आती हैं, उस समाज में कुछ लोग राजनीति के नाम पर अक्सर सनातनी लोगों को हिन्दू धर्म से दूर करने की बड़ी कोशिश करते हुए दिखाई देते है , लेकिन अयोध्या में राष्ट्र पति द्रोपदी मुर्मू की मौजूदगी ने एक अलग ही संदेश दिया – कि भारत में आस्था और अवसर किसी जाति या वर्ग की सीमा में बंधे नहीं हैं। इस कार्यक्रम में करीब 7000 विशिष्ट अतिथि भी शामिल हुए जो इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग देकर अपनी आस्था जता चुके हैं।
ALSO READ:“विक्रम संवत 2083: इतिहास, विज्ञान और परंपरा का अनोखा संगम”
अब जब राम मंदिर अपने पूर्ण स्वरूप की ओर बढ़ रहा है तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा श्रीराम यंत्र की स्थापना एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में देखी जा रही है। यह दृश्य बताता है कि नया भारत सामाजिक विभाजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता और आस्था के साझा गौरव की कहानी लिख रहा है।






