चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज सूर्योदय की पहली किरण के साथ हो चुकी है… और इसी के साथ पूरे देश में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है। बुंदेलखंड में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देवी मंदिरों में उमड़ पड़ी है… खास तौर पर हमीरपुर स्थित प्राचीन माँ चौरा देवी मंदिर में।सदियों से बुंदेलखंड आध्यात्म और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है…
Also Read_यूपी को जल्द मिलेगा स्थायी डीजीपी! राजीव कृष्ण का नाम सबसे आगे, यूपीएससी को भेजा गया पैनल

यहाँ आज भी हजारों साल पुराने मंदिर और मूर्तियाँ लोगों की आस्था का केंद्र हैं।नवरात्रि के पहले दिन माँ के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु चौरा देवी मंदिर पहुंच रहे हैं।कहा जाता है कि माँ चौरा देवी की यह प्रतिमा लगभग 5 हजार वर्ष पुरानी है…माँ के सिर पर चाँदी का छत्र, गले में सोने और हीरे-मोतियों की माला और लाल चुनरी उनकी भव्यता को और बढ़ा देती है।भले ही माँ का स्वरूप उग्र दिखाई देता हो…लेकिन भक्तों के अनुसार माँ बेहद दयालु हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।मंदिर के पीछे स्थित पीपल के पेड़ को लेकर भी मान्यता है कि इसी के भीतर से माँ का प्राकट्य हुआ था।

इतिहासकार इस प्रतिमा को जैन काल से जोड़ते हैं… वहीं कुछ लोग इसे नाग कन्या का स्वरूप भी मानते हैं, क्योंकि मूर्ति पर पांच शेषनाग अंकित हैं।“यह माँ चौरा देवी का प्राचीन मंदिर है… यहाँ जो भी सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।”मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक और मान्यता के अनुसार…कभी यहाँ घना जंगल हुआ करता था… और एक अंग्रेज कलेक्टर की पत्नी को माँ ने सपने में दर्शन दिए थे .जिसके बाद इस मूर्ति को पेड़ से निकालकर स्थापित किया गया। “हम हर साल यहाँ आते हैं… माँ से जो भी मांगा, वो मिला है… बहुत आस्था है हमारी।”‘चौरा’ यानी कष्टों को चुराने वाली देवी…यही कारण है कि यहाँ आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।नवरात्रि के इस पावन अवसर पर माँ चौरा देवी का दरबार भक्ति और विश्वास का अद्भुत संगम बन गया है।आस्था और विश्वास की ये तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि नवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं… बल्कि लोगों की गहरी श्रद्धा का प्रतीक है।






