लखनऊ: उत्तर प्रदेश को जल्द ही अपना स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल सकता है। योगी सरकार ने इस संबंध में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल भेज दिया है। माना जा रहा है कि वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण इस दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में आखिरी स्थायी डीजीपी मुकुल गोयल थे, जिन्हें 11 मई 2022 को पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से अब तक यूपी पुलिस की कमान कार्यवाहक डीजीपी के जरिए ही संभाली जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य सरकार ने प्रक्रिया पूरी करते हुए 1990 से 1996 बैच के उन आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजे हैं, जिन्होंने अपनी 30 साल की सेवा पूरी कर ली है। अब यूपीएससी इन नामों में से वरिष्ठता और सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को वापस भेजेगी, जिनमें से एक नाम पर मुख्यमंत्री अंतिम मुहर लगाएंगे।

सीनियरिटी के आधार पर 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा का नाम सबसे ऊपर है, जो वर्तमान में डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध हैं। वहीं 1991 बैच के आलोक शर्मा इस समय केंद्र में डीजी एसपीजी के पद पर तैनात हैं, जबकि पीयूष आनंद डीजी एनडीआरएफ के रूप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। इसी बैच के राजीव कृष्ण फिलहाल उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी हैं और पीसी मीणा डीजी जेल के पद पर तैनात हैं।

सूत्रों के मुताबिक अंतिम तीन नामों के पैनल में राजीव कृष्ण का नाम शामिल होने की प्रबल संभावना है। उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और वर्तमान जिम्मेदारी को देखते हुए सरकार उनके नाम पर सहमति बना सकती है।
राजीव कृष्ण 1991 बैच के अनुभवी आईपीएस अधिकारी हैं और पुलिस विभाग में उनका लंबा अनुभव रहा है। यदि उनकी नियुक्ति होती है तो उत्तर प्रदेश पुलिस को एक स्थायी और अनुभवी नेतृत्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।






