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जालौन कृषि विभाग में चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले की जांच तेज, लखनऊ से 3 सदस्यीय टीम पहुंची

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जालौन जिले के कृषि विभाग में रिटायर कर्मचारियों (पेंशनर्स) की चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर हुए कथित घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। इस मामले की गहराई से पड़ताल करने के लिए लखनऊ स्थित कृषि निदेशालय से 3 सदस्यीय टीम जालौन पहुंची है। टीम का नेतृत्व वरिष्ठ अधिकारी डॉ. आशुतोष मिश्रा कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि विभाग में पेंशनर्स के चिकित्सा बिलों के भुगतान के नाम पर फर्जी बिल और दस्तावेज लगाकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। इस अनियमितता की शिकायत सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद उच्च स्तर से जांच के आदेश दिए गए।

जांच टीम ने जालौन पहुंचते ही उप कृषि निदेशक कार्यालय में दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। टीम संबंधित फाइलों, भुगतान रजिस्टर, बिल वाउचर और अन्य अभिलेखों का बारीकी से परीक्षण कर रही है। अचानक टीम के पहुंचने से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

इस मामले में विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पहले ही अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए विभाग में तैनात बाबू श्याम जी और हर्ष वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर विभाग के अंदर ही सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, पूरे प्रकरण में यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि क्या उच्च अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर कार्रवाई का ठीकरा फोड़ दिया। खासकर ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) और कृषि निदेशालय की भूमिका को लेकर भी जांच टीम गहराई से पड़ताल कर रही है।

जांच टीम चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़े सभी मामलों की क्रॉस वेरिफिकेशन कर रही है। फर्जी बिलों के जरिए भुगतान कैसे हुआ, किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई, और किन-किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है—इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।

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