उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बुलडोजर की गूंज सुनाई दे रही है और इस बार निशाने पर सिर्फ माफिया ही नहीं बल्कि उनकी कब्जाई हुई करोड़ों की जमीन भी है। जी हां, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘ऑपरेशन आवास’ के जरिए एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक चला है जिसने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। जो जमीनें कभी बाहुबलियों और माफियाओं के कब्जे में थीं, अब उन्हीं जमीनों पर पत्रकारों, वकीलों और शिक्षकों के लिए घर बनाए जाएंगे।
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बीते दिनों प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी 2.0) के तहत 90 हजार लाभार्थियों को 900 करोड़ की पहली किस्त जारी करते हुए सीएम योगी ने साफ संदेश दिया कि अब माफियाओं की नहीं बल्कि मध्यम वर्ग और आम लोगों की सरकार चलेगी। 2017 से पहले जिन जमीनों पर अवैध कब्जे सत्ता की मिलीभगत से चलते थे, अब वहां हाईराइज अपार्टमेंट बनाकर समाज के जरूरतमंद वर्ग को बसाने की तैयारी है। योगी सरकार का यह कदम सिर्फ एक आवास योजना नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है – माफिया की जमीन पर अब हक होगा आम नागरिक का। अब देखना होगा कि ‘ऑपरेशन आवास’ यूपी की राजनीति में कितना बड़ा गेमचेंजर साबित होता है।सीएम योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश अब अपनी ‘बीमारू राज्य’ वाली पुरानी छवि को पीछे छोड़कर देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में अब तक लगभग 62 लाख परिवारों को आवास मिल चुका है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ घर देना नहीं है, बल्कि उसके साथ बिजली, पानी, शौचालय, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और आयुष्मान योजना जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी मुफ्त देना है।






