चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही देशभर में भक्ति का माहौल बन गया है,चैत्र नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, इस खास मौके पर हम आपको एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति माता के दर्शन जरूर करता है।
प्राचीन और जागृत सिद्धपीठ रंकिणी देवी मंदिर
झारखंड के जमशेदपुर के पास जादूगोड़ा क्षेत्र में स्थित रंकिणी देवी मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और जागृत सिद्धपीठ माना जाता है, रंकिणी देवी मंदिर कपड़गड़ी घाट के पास रोहिणीबेरा गांव में स्थित है और यह मुख्य रूप से मां काली को समर्पित है, यह मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं और आस्था के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।
पत्थर में विराजमान हैं मां काली
मंदिर में स्थापित पत्थर की मूर्ति को मां काली का साक्षात स्वरूप माना जाता है, स्थानीय मान्यता के अनुसार देवी रंकिणी पत्थर में विराजमान हैं, मूर्ति का आकार और चमक समय के साथ बढ़ती जा रही है, यह स्थान आज भी ‘जागृत’ माना जाता है
बिना दर्शन आगे नहीं बढ़ते यात्री
इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां से गुजरने वाले यात्री, वाहन चालक, छात्र सभी लोग माता के दर्शन और आशीर्वाद लेकर ही आगे की यात्रा करते हैं, कहा जाता है कि पहले जब यह इलाका घने जंगलों से घिरा था, तब लोग अपनी सुरक्षा के लिए यहां पूजा करते थे। यह परंपरा आज भी जारी है।
नवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष रौनक देखने को मिलती है, नौ दिनों तक विशेष पूजा और श्रृंगार, सुबह-शाम भव्य आरती, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़, मंदिर सड़क किनारे स्थित होने के कारण यहां पहुंचना भी काफी आसान है, जिससे हर उम्र के श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर पाते हैं।
रंकिणी देवी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम है, यहां की मान्यता और श्रद्धा इसे देश के खास सिद्धपीठों में शामिल करती है, अगर आप भी चैत्र नवरात्रि के दौरान किसी खास और चमत्कारी स्थल के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह मंदिर आपके लिए एक अनोखा अनुभव साबित हो सकता है।






