क्या उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पर अब खुली राजनीतिक धमकियों का दौर शुरू हो गया है? क्या अपराधियों के खिलाफ हो रही पुलिस कार्रवाई को अब सांप्रदायिक चश्मे से देखने की कोशिश हो रही है? और क्या एक बयान से प्रदेश की सियासत में नया तूफान खड़ा हो गया है? मेरठ में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष हाजी शौकत अली के एक विवादित बयान ने राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है। ईद मिलन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से कहा कि “जो मुसलमानों का एनकाउंटर कर रहे हैं उनका भी एनकाउंटर होगा”।
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इस बयान के सामने आने के बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है। दरअसल उत्तर प्रदेश में पुलिस की एनकाउंटर कार्रवाई को सरकार अपराध नियंत्रण की नीति का हिस्सा बताती रही है और यह कार्रवाई उन अपराधियों के खिलाफ बताई जाती है जिन पर हत्या, लूट और संगठित अपराध जैसे गंभीर आरोप रहे हैं। ऐसे में AIMIM नेता के इस बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासन को चुनौती देने जैसा है। यही नहीं, हाजी शौकत अली पहले भी विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। इससे पहले उन्होंने महाराजा सुहेलदेव को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिस पर काफी विवाद हुआ था। अब उनके ताजा बयान ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी पार्टी को 11 विधायक मिल जाएं तो वह अपनी राजनीतिक ताकत दिखा सकते हैं। इसे भी राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस विवादित बयान पर सरकार और प्रशासन क्या रुख अपनाते हैं और क्या इस पर कोई कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि एक बयान ने सियासत को फिर से गरमा दिया है और कानून व्यवस्था पर बहस को तेज कर दिया है।






