उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है और इसकी वजह बनी हैं अभिनेत्री से नेता बनीं भाजपा की जया प्रदा। लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने के बाद उनका अचानक लखनऊ दौरा और पार्टी के बड़े नेताओं से मुलाकात करना सियासी चर्चाओं का विषय बन गया है। 22 मार्च को लखनऊ पहुंचने के बाद जया प्रदा ने सबसे पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात की। इस मुलाकात को सिर्फ औपचारिक नहीं माना जा रहा, बल्कि माना जा रहा है कि इसमें संगठन और आने वाले चुनावों को लेकर संभावित रणनीतियों पर चर्चा हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।इसके बाद जया प्रदा ने भाजपा नेता अपर्णा यादव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं, जिनमें दोनों को गर्मजोशी से मिलते देखा गया। इस मुलाकात को पार्टी के अंदर एकजुटता और भविष्य की रणनीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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कुछ ही घंटों के भीतर दो बड़े नेताओं से मुलाकात के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जया प्रदा फिर से यूपी की सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रही हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक भूमिका का संकेत भी हो सकता है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सभी राजनीतिक दल अभी से अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं। ऐसे में जया प्रदा जैसी अनुभवी और चर्चित नेता की सक्रियता भाजपा के लिए अहम मानी जा रही है।अगर उनके राजनीतिक सफर की बात करें तो जया प्रदा ने राजनीति की शुरुआत दक्षिण भारत से की थी, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय पहचान उत्तर प्रदेश के रामपुर से मिली। वह 2004 और 2009 में रामपुर से लोकसभा सांसद चुनी गईं और उस दौरान उन्होंने क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी फिल्मी लोकप्रियता ने भी उनकी राजनीतिक पहचान को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई।

2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी कम दिखाई देती थीं। ऐसे में अब उनकी अचानक बढ़ी सक्रियता को उनकी संभावित राजनीतिक वापसी के रूप में देखा जा रहा है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जया प्रदा की यह सक्रियता आगे किस रूप में सामने आएगी। क्या वह 2027 का चुनाव लड़ेंगी या फिर पार्टी संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगी। फिलहाल पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही उनकी भूमिका को लेकर स्थिति साफ हो सकती है।राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि भाजपा महिला वोटरों को साधने के लिए जया प्रदा को एक प्रभावशाली चेहरे के रूप में सामने ला सकती है। वहीं सोशल मीडिया पर उनकी मुलाकातों की तस्वीरों के वायरल होने के बाद इस मुद्दे पर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।कुल मिलाकर, जया प्रदा की सक्रियता ने यूपी की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में उनकी भूमिका पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।






