यहां गैस सिलिंडर की किल्लत की मार अब गरीब बच्चों की थाली तक पहुंच गई है। हालात इतने खराब हैं कि करीब 300 सरकारी स्कूलों में चूल्हे ठंडे पड़ चुके हैं और लगभग 25 हजार बच्चों का दोपहर का खाना बंद हो गया है।सोचिए… जो बच्चे सुबह स्कूल इस उम्मीद से आते हैं कि कम से कम दोपहर का खाना तो मिलेगा… उन्हें अब भूखे पेट ही घर लौटना पड़ रहा है। किसी का पेट खाली है… किसी की आंखों में सवाल है… और कोई मजबूरी में स्कूल छोड़कर घर भाग रहा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ के माल और मलिहाबाद क्षेत्र के करीब 315 परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील योजना के तहत हजारों बच्चों के लिए रोज खाना बनता है। लेकिन पिछले करीब 15 दिनों से चल रही गैस की किल्लत ने अब इस योजना को भी प्रभावित कर दिया है।

जैसे-जैसे स्कूलों में गैस सिलिंडर खत्म होते गए… वैसे-वैसे बच्चों के चूल्हे भी ठंडे पड़ते गए।प्रधानाध्यापकों का कहना है कि करीब 300 स्कूलों में बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल पा रहा और लगभग 22 से 25 हजार बच्चे इससे प्रभावित हैं। सिर्फ 10-15 स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षक या ग्राम प्रधान अपने घर से सिलिंडर लाकर जैसे-तैसे खाना बनवा रहे हैं।शिक्षकों का कहना है कि गरीब परिवारों से आने वाले ज्यादातर बच्चों के लिए मिड डे मील ही दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन होता है। जब वह भी नहीं मिल रहा तो बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कुछ अभिभावकों का कहना है कि बच्चे अब पूछ रहे हैं – “स्कूल जाएं तो क्यों जाएं… जब खाना ही नहीं मिलेगा?” अब सवाल यही है – क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी? क्या गरीब बच्चों की थाली भी सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगी? और क्या इन 25 हजार बच्चों को फिर से समय पर खाना मिल पाएगा? जाएगी।






