ईरान में इंटरनेट को लेकर एक बड़ा बदलाव होने की खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान सरकार ऐसा सिस्टम तैयार कर रही है जिसमें देश खुद को ग्लोबल इंटरनेट से अलग कर सकता है। यानी आम लोगों को पूरी दुनिया के इंटरनेट तक पहुंच नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें सिर्फ एक सीमित ‘नेशनल इंटरनेट’ का इस्तेमाल करना होगा।
बताया जा रहा है कि सरकार केवल चुनिंदा लोगों को ही ग्लोबल इंटरनेट इस्तेमाल करने की अनुमति देगी। ये लोग भी पूरी तरह से खुला इंटरनेट नहीं, बल्कि एक फिल्टर किया हुआ वर्जन ही इस्तेमाल कर पाएंगे। बाकी आम जनता को ऐसा इंटरनेट दिया जाएगा, जो केवल देश के अंदर ही काम करेगा और उस पर कई तरह की पाबंदियां होंगी।
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दरअसल, ईरान में हाल के दिनों में सरकार विरोधी प्रदर्शन बढ़े हैं। इसी वजह से पिछले करीब 12 दिनों से इंटरनेट बंद किया गया है। इस दौरान आम लोग दुनिया से कटे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कदम की आलोचना हो रही है और कहा जा रहा है कि इससे लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी प्रभावित हो रही है।
रिपोर्ट्स में ‘फिल्टरवॉच’ नाम के संगठन के हवाले से बताया गया है कि सरकार एक गुप्त योजना पर काम कर रही है। इसके तहत ग्लोबल इंटरनेट को एक तरह की ‘सरकारी सुविधा’ बना दिया जाएगा। मतलब, इंटरनेट तक पहुंच भी अब सरकार की मंजूरी पर निर्भर होगी।
सरल भाषा में समझें तो जिन लोगों को सरकार से अनुमति मिलेगी, वही लोग ग्लोबल इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएंगे। बाकी लोगों को सिर्फ सरकारी नेटवर्क मिलेगा, जिसमें सीमित वेबसाइट्स और ऐप्स ही चलेंगे। यह नेटवर्क पूरी तरह से कंट्रोल में होगा और बाहरी दुनिया से कनेक्शन लगभग खत्म हो जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह इंटरनेट बंदी अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी भी हो सकती है। यानी भविष्य में हमेशा के लिए ऐसा सिस्टम लागू किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार ने संकेत दिया है कि ग्लोबल इंटरनेट कम से कम 20 मार्च तक बंद रह सकता है, लेकिन आगे क्या होगा, यह साफ नहीं है।
एक और अहम बात यह है कि ईरान ‘व्हाइटलिस्टिंग’ तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है। इस तकनीक में सिर्फ कुछ तय लोगों या संस्थानों को ही इंटरनेट एक्सेस दिया जाता है, बाकी सबको ब्लॉक कर दिया जाता है। माना जा रहा है कि इस तरह की तकनीक चीन से प्रेरित हो सकती है।
इसके अलावा, सरकार हाई-टेक डिवाइस का भी इस्तेमाल कर सकती है, जो इंटरनेट ट्रैफिक को कंट्रोल करते हैं। इनकी मदद से वेबसाइट्स, सोशल मीडिया और VPN जैसी सेवाओं को आसानी से ब्लॉक किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान ऐसा करता है, तो इसका असर सिर्फ इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था, कारोबार, शिक्षा और लोगों की आजादी पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, अगर यह योजना लागू होती है, तो ईरान की डिजिटल दुनिया पूरी तरह बदल जाएगी। आम लोग सीमित इंटरनेट तक ही सिमट जाएंगे, जबकि ग्लोबल कनेक्टिविटी सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित रह जाएगी।






