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चैत्र नवरात्र में आस्था का सागर: गाजीपुर के करहिया स्थित मां कामाख्या मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

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चैत्र नवरात्र पुरे देश के देवी मंदिरो मे भक्तो का जमावडा लगा हुआ है। हर कोई मां का आर्शीवाद लेकर पुण्य का भागी बनना चाहता है। जनपद गाजीपुर मे भी एक मंदिर जिसे पुर्वांचल के लोग मां कामख्या के नाम से जानते है यहां पर भी नवरात्र के पावन पर्व पर भीड देखने को मिल रहा है। मां कामख्या जो यहां के सिकरवार वंश की कुल देवी है वही इनकी एक अलग मान्यता भी है की इन्हे सैनिको की मां भी कहा जाता है। जी हां जनपद गाजीपुर के गहमर गांव यहां पर औसतन प्रत्येक घर मे एक सैनिक है तो गांव के आर्थिक साधन का जरिया भी सेना है। आज इस गांव के जवान कारगिल या फिर कोई भी लड़ाई की घटना हो यहां के जवान हर जंग व हर मोर्चे पर रहते है लेकिन जंग के मैदान मे अभी तक किसी की शहादत नही होती। इसका श्रेय सैनिक और गांव के लोग अपनी कुलदेवी मां कामख्या को देते है। ऐसे में इस नवरात्र के नौ दिनों में जहां मन के मंदिर में भक्तों की भीड़ होती है वहीं रामनवमी के अवसर पर भी आज काफी भीड़ देखने को मिली

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नवरात्र का महीना हो देवी मंदिरों की बात ना हो यह बेमानी है ऐसे में आज हम आपको गाजीपुर के करहिया गांव स्थित मां कामाख्या के मंदिर के बारे में बात करेंगे जो गाजीपुर से बिहार जोड़ने वाले रास्ते पर स्थित है जहां यूपी और बिहार के लोग नवरात्र में दर्शन पूजन के लिए आ रहे हैं एक तरफ जहां लोग श्रद्धा भाव से मां का दर्शन पूजन कर रहे हैं तो वही करहैया गांव के बगल का गांव गहमर है। इस गांव के वीर सपुतो की रक्षा करने वाली मां कामख्या की अगर बात करे तो मां सकरवार वंश की कुल देवी है जो फतेहपुर सिकरी से आकर यहां पर विराजमान है।

जिसकी मान्यता है की यहां के हर घर का एक जवान सेना की नौकरी मे जुडा है। यहां के जवान डयुटी पर जाने से पूर्व और आने से पहले मां कामख्या के दर्शन कर ही आगे बढता है और प्रार्थना करता है की मां उनकी रक्षा करे और वो देश की रक्षा करे। इतना ही नही आज इस गांव की जो भी सैनिक डयुटी से वापस आता है तो घर आने से पहले मां का आशीर्वाद लेने मन्दिर जाता है फिर घर आता है। और जब छुट्टी खत्म होने के बाद वापस जाता है तो अपनी ट्रेन पकडने से पूर्व मां से आर्शीवाद और अपनी रक्षा की गुहार लगा अपनी डयुटी वापस चला जाता है। सेना मे डयुटी के दौरान किसी भी सैनिक की शहादत नही होने के पीछे पूर्व सैनिक और ग्रामीण इसे अपनी कुल देवी का अशीर्वाद मानते है और उनका कहना है की मां की ऐसी कृपा आगे भी बना रहेगी । यहां के हर फौजी की मां मां की कृपा की वजह से अपने बेटों को सीमा पर हंस कर भेजती हैं क्योंकि वह जानती हैं कि उनके बेटे की रक्षा जब उनकी कुलदेवी मां कामाख्या कर रही है तूने डरने की क्या बात है।एक ओर यह मंदिर जहां हमारे वीर सपुतो की रक्षा के लिये जाना जाता है वही नवरात्र के दिनो मे भारी भीड भी होती है। पहले यह मंदिर जंगलो की तरह हुआ करता था लेकिन स्थानीय लोग व राजनिति से संबंधित रहने वाले लोगो ने इस मंदिर परिसर के विकास के लिये लगातार काम करते रहे है। तब जाकर आज यह मंदिर पुर्वांचल मे अपना अहम स्थान बनाया हुआ है। 

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