Home Uttar Pradesh मऊ सदर सीट: अंसारी परिवार की पकड़ और बदलते सियासी समीकरण

मऊ सदर सीट: अंसारी परिवार की पकड़ और बदलते सियासी समीकरण

10
0

उत्तर प्रदेश की मऊ सदर विधानसभा सीट पिछले करीब 20 सालों से अंसारी परिवार का मजबूत गढ़ बनी हुई है। यहां से Mukhtar Ansari ने लंबे समय तक राजनीति की और अब उनके निधन के बाद उनके बेटे Abbas Ansari इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। इस सीट की राजनीति को समझने के लिए यहां के सामाजिक समीकरणों को जानना बहुत जरूरी है।

मऊ सदर में चुनावी राजनीति मुख्य रूप से मुस्लिम और दलित मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमती है। इन दोनों वर्गों का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से अंसारी परिवार का समर्थन करता रहा है। यही कारण है कि तमाम राजनीतिक बदलावों और सरकारों के बदलने के बावजूद इस परिवार की पकड़ कमजोर नहीं हुई। स्थानीय स्तर पर मजबूत जनसंपर्क और संगठन भी उनकी ताकत माने जाते हैं।

Also Read- बॉक्स ऑफिस पर रणवीर सिंह की धुरंधर 2’ का धमाका1200 करोड़ के क्लब में हुई शामिल

हालांकि, इस बार का चुनाव पहले से ज्यादा दिलचस्प माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी यानी Bharatiya Janata Party इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी ने यहां जातिगत समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। खासतौर पर राजपूत, यादव और ब्राह्मण वोटरों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है।

बीजेपी के साथ-साथ उसके सहयोगी दल भी इस सीट पर सक्रिय हैं। Suheldev Bharatiya Samaj Party (सुभापा) के साथ मिलकर भाजपा यहां नई रणनीति बना रही है। इन दलों की कोशिश है कि पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाकर अंसारी परिवार की मजबूत पकड़ को चुनौती दी जाए।

दूसरी ओर, अंसारी परिवार को अभी भी स्थानीय स्तर पर मजबूत माना जा रहा है। Mukhtar Ansari के निधन के बाद सहानुभूति की लहर भी देखने को मिली है, जिसका फायदा Abbas Ansari को मिल सकता है। इसके अलावा, उनका अपना जनाधार भी धीरे-धीरे मजबूत होता दिख रहा है।

इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी यानी Bahujan Samaj Party भी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में लगी है। बसपा का पारंपरिक दलित वोट बैंक इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। अगर बसपा इस वोट को फिर से एकजुट करने में सफल होती है, तो मुकाबला और भी कड़ा हो सकता है।

मऊ की राजनीति पर पुराने आपराधिक और राजनीतिक मामलों का भी असर पड़ता रहा है। Atiq Ahmed और Raju Pal जैसे मामलों की चर्चा आज भी यहां के राजनीतिक माहौल में सुनाई देती है। इसके अलावा, जमीन से जुड़े विवाद और स्थानीय मुद्दे भी चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं।

आने वाले चुनाव में टिकट वितरण भी एक बड़ा मुद्दा रहेगा। कौन सा दल किसे उम्मीदवार बनाता है और किस तरह के गठबंधन बनते हैं, इससे चुनाव का रुख तय होगा। हालांकि, अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में ही है।

कुल मिलाकर, मऊ सदर सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति की एक अहम और दिलचस्प सीट है। यहां जातिगत समीकरण, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है। यही वजह है कि हर चुनाव में यह सीट खास चर्चा में रहती है। इस बार भी मुकाबला कड़ा होने वाला है और यह देखना दिलचस्प होगा कि मऊ की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here