देश की राजनीति में एक नई हलचल मच गई है…एक सर्वे आया… एक लिस्ट जारी हुई… और उस लिस्ट ने सियासी गलियारों में बहस की आग लगा दी…
क्योंकि इस लिस्ट में देश के सबसे ताकतवर और लोकप्रिय नेताओं की रैंकिंग जारी हुई…नंबर 1 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…नंबर 2 पर गृह मंत्री अमित शाह…लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हो रही है… वो है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का…क्योंकि जो योगी 2024 और 2025 में इस लिस्ट में छठे नंबर पर थे…उन्हें इस बार सीधे 8वें नंबर पर दिखाया गया है…अब सवाल उठ रहे हैं…कि क्या योगी की लोकप्रियता घटी है? क्या योगी का राजनीतिक कद कम हुआ है? या फिर इसके पीछे कोई बड़ी सियासी रणनीति है? आखिर क्या कहता है यह सर्वे… और क्यों तेज हो गई है मोदी के बाद कौन की लड़ाई…आज हम आपको पूरी कहानी बताएंगे…
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दरअसल इंडियन एक्सप्रेस द्वारा जारी की गई देश के 100 सबसे ताकतवर लोगों की सूची ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का सबसे प्रभावशाली नेता बताया गया है, जबकि अमित शाह को दूसरा स्थान मिला है। RSS प्रमुख मोहन भागवत तीसरे और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चौथे स्थान पर हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पांचवां स्थान दिया गया है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैंकिंग को लेकर हो रही है। क्योंकि पिछले दो सालों में जहां योगी आदित्यनाथ इस सूची में छठे स्थान पर थे, वहीं इस बार उन्हें आठवें स्थान पर रखा गया है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी को नौवें स्थान पर रखा गया है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सच में योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता में गिरावट आई है… या फिर यह सिर्फ एक सर्वे की गणित है? राजनीतिक जानकारों की मानें तो सिर्फ रैंकिंग से किसी नेता की ताकत तय नहीं होती। योगी आदित्यनाथ आज भी देश के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं। कई सर्वे में उन्हें देश का सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री भी बताया जा चुका है। योगी की पहचान एक ऐसे नेता की बनी है जो प्रशासनिक सख्ती, हिंदुत्व की राजनीति और मजबूत कानून व्यवस्था के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश से बाहर भी उनकी पहचान लगातार बढ़ी है। राजनीतिक गलियारों में तो यहां तक कहा जाता है कि अगर बीजेपी में मोदी के बाद किसी नेता का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आता है तो उसमें अमित शाह के साथ योगी आदित्यनाथ का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है।कुछ समय पहले इंडिया टुडे के एक सर्वे में जब सवाल पूछा गया था कि मोदी के बाद देश का नेतृत्व कौन कर सकता है, तो अमित शाह को 29 प्रतिशत और योगी आदित्यनाथ को 28 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया था। यानी दोनों के बीच सिर्फ 1 प्रतिशत का अंतर था। ऐसे में अब यह नई रैंकिंग आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि असली परीक्षा 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होगा। अगर योगी आदित्यनाथ लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी करते हैं तो उनका राष्ट्रीय कद और मजबूत हो सकता है।लेकिन यह राह आसान नहीं है। एक तरफ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) समीकरण…दूसरी तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती की सक्रियता…और तीसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद जैसे उभरते दलित नेता… ये सभी मिलकर यूपी की राजनीति को और दिलचस्प बना रहे हैं। वहीं बीजेपी के अंदर भी कई बार अंदरूनी खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं, हालांकि पार्टी सार्वजनिक रूप से इसे नकारती रही है। योगी आदित्यनाथ लगातार अपने भाषणों में हिंदू एकता और जातिगत विभाजन से ऊपर उठने की बात करते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उनकी लंबी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। योगी की खासियत यह भी मानी जाती है कि दबाव के समय वह और ज्यादा आक्रामक तरीके से राजनीति करते हैं। 2017 से लेकर अब तक उनके कार्यकाल में कई ऐसे मौके आए जब उन पर राजनीतिक दबाव बना, लेकिन हर बार वह और मजबूत होकर उभरे। अब नजरें इस बात पर हैं कि आने वाले समय में योगी आदित्यनाथ अपनी राजनीतिक पकड़ को राष्ट्रीय स्तर पर कितना मजबूत कर पाते हैं। क्योंकि भारतीय राजनीति में एक सवाल लगातार तैर रहा है…मोदी के बाद कौन? और इस सवाल के जवाब में जिन नामों की चर्चा होती है… उनमें अमित शाह के साथ योगी आदित्यनाथ का नाम भी लगातार लिया जाता है। अब देखना यह होगा कि 2027 का यूपी चुनाव इस राजनीतिक समीकरण को कितना बदलता है… क्योंकि दिल्ली की राह अक्सर लखनऊ से होकर ही गुजरती है।






