Home Political news राम के नाम पर सत्ता, लेकिन राम के अपमान पर चुप्पी क्यों?

राम के नाम पर सत्ता, लेकिन राम के अपमान पर चुप्पी क्यों?

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उत्तर प्रदेश…वही उत्तर प्रदेश जहां से भारतीय जनता पार्टी ने यह नारा दिया था – “जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे”।वही उत्तर प्रदेश जहां अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ, जहां हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर दीपोत्सव मनाया जाता है, और जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद को रामभक्त और सनातन संस्कृति का रक्षक बताते हैं। लेकिन आज एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है जो करोड़ों रामभक्तों के मन में बेचैनी पैदा कर रहा है। सवाल यह है कि क्या भगवान राम अब सिर्फ राजनीति का मुद्दा बनकर रह गए हैं? क्या राम का नाम सिर्फ चुनावी मंचों तक सीमित हो गया है? क्योंकि इसी उत्तर प्रदेश में यदुनंदन वर्मा नाम के एक व्यक्ति ने भगवान श्रीराम और उनकी माता के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया, लेकिन कुछ ही दिनों में वह बाहर आ गया। और हैरानी की बात तो यह रही कि बाहर आने के बाद उसका फूल-मालाओं से स्वागत हुआ, उसके समर्थन में नारे लगे।

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अब सवाल यह उठता है कि अगर करोड़ों हिंदुओं के आराध्य भगवान राम के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल होता है तो क्या सिर्फ FIR काफी है? क्या ऐसी घटनाओं पर सख्त और उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? दूसरी तरफ जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां पर टिप्पणी करने वाले मौलाना सलीम को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो कार्रवाई काफी सख्त नजर आई। वीडियो भी सामने आए। तो जनता के मन में यह तुलना स्वाभाविक है कि एक तरफ मुख्यमंत्री की मां पर टिप्पणी पर तुरंत कठोर कार्रवाई और दूसरी तरफ भगवान राम की माता पर टिप्पणी करने वाला जल्दी बाहर कैसे? यही वह सवाल है जो अब सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या भगवान राम की आस्था राजनीति से छोटी हो गई है? क्या वोट बैंक की मजबूरियां आस्था से ऊपर हो गई हैं? क्या सनातन धर्म के देवी-देवताओं के सम्मान पर अब दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं? हालांकि यदुनंदन वर्मा के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं, FIR भी हुई है, लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या आगे कोई कड़ी कार्रवाई होगी या मामला सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। क्योंकि आस्था का सवाल सिर्फ किसी एक पार्टी या विचारधारा का नहीं होता, यह करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा होता है। और शायद यही वजह है कि आज कई रामभक्त यह सवाल पूछ रहे हैं— क्या राम का नाम सिर्फ मंचों तक रहेगा या उनके सम्मान की रक्षा जमीन पर भी दिखाई देगी?

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