क्या आम आदमी पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा? क्या पार्टी के युवा और चर्चित चेहरों में शामिल राघव चड्ढा अब नेतृत्व की पहली पसंद नहीं रहे? और आखिर ऐसा क्या हुआ कि AAP ने अपने ही तेज-तर्रार सांसद को राज्यसभा में डिप्टी लीडर जैसे अहम पद से हटा दिया? दिल्ली से लेकर पंजाब तक सियासी गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब यह जिम्मेदारी पंजाब से ही राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को सौंप दी गई है।
also read गुजरात में AAP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर Kejriwal का आरोप, मुख्यमंत्री से मांगा मिलने का समय

पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर इस बदलाव की औपचारिक जानकारी भी दे दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला अचानक नहीं बल्कि पिछले कुछ समय से चल रही अंदरूनी नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि जब दिल्ली की कथित आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं को जमानत मिली, तब पार्टी के कई नेता आक्रामक तरीके से सामने आए लेकिन राघव चड्ढा की चुप्पी ने नेतृत्व को हैरान किया। पार्टी के अंदर यह संदेश गया कि इतने बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर उनका सक्रिय न दिखना सवाल खड़े करता है। दूसरी बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि राज्यसभा में पार्टी के तय समय में राघव चड्ढा अधिक बोलते थे, जिससे अन्य सांसदों को कम अवसर मिल रहा था। इसे लेकर भी पार्टी के अंदर असंतोष की चर्चा रही। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से संगठनात्मक गतिविधियों में उतने सक्रिय नहीं दिख रहे थे जितनी उनसे अपेक्षा थी। जबकि पार्टी कई बड़े राजनीतिक उतार-चढ़ाव से गुजर रही थी, उस दौरान उनकी कम सक्रियता चर्चा का विषय बनी रही। इस बीच जब AAP सांसद संजय सिंह से यह सवाल पूछा गया कि क्या राघव चड्ढा किसी दूसरे दल में जा सकते हैं, तो उनका जवाब भी काफी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा – “यह आप उनसे पूछिए, लेकिन अगर ऐसा होता है तो उनके खिलाफ सबसे पहले मैं खड़ा रहूंगा।” इस बयान ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आम आदमी पार्टी का एक स्पष्ट संदेश भी हो सकता है कि पार्टी में पद से ज्यादा महत्व सक्रियता और सामूहिक रणनीति को दिया जाएगा। साथ ही यह भी संकेत माना जा रहा है कि AAP अपने संगठन को 2027 और आगे के चुनावों को देखते हुए और ज्यादा अनुशासित करना चाहती है। फिलहाल राघव चड्ढा ने इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन इतना तय है कि इस फैसले ने AAP की अंदरूनी राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या राघव चड्ढा अपनी भूमिका को लेकर कोई सफाई देंगे या पार्टी की ओर से आगे कोई और बड़ा फैसला देखने को मिलेगा।






