देहरादून: पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में अतिक्रमण को लेकर कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। पिछले वर्ष उत्तराखंड में आई भीषण आपदा के संदर्भ में मुख्यमंत्री का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने आपदा की भयावहता के पीछे अतिक्रमण को एक प्रमुख कारण बताया है।
सीएम धामी ने कहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में नदियों, गाड़-गधेड़ों और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है। इन अतिक्रमणों के कारण पानी के बहाव में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे जलभराव की स्थिति बनी और आपदा ने विकराल रूप ले लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्राकृतिक जल मार्गों को बाधित न किया गया होता, तो नुकसान और जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अब सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भविष्य में सरकारी भूमि, नदियों, नालों और जल निकासी के प्राकृतिक रास्तों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
इसके साथ ही सीएम धामी ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि अब अतिक्रमण के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर तत्काल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की आपदा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।






