“मैं तो आया हूं यूपी-बिहार लूटने…” गाना तो सुना ही होगा, लेकिन कानपुर के एक अफसर ने इसे जैसे अपनी नौकरी का थीम सॉन्ग बना लिया! फर्क बस इतना है कि ये कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की असली पटकथा है, जिसमें किरदार हैं वाणिज्य कर विभाग के रिटायर्ड एडिशनल कमिश्नर केशव लाल। कानपुर विजिलेंस ने केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है और जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने सबको चौंका दिया है।
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बताया जा रहा है कि नौकरी के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति खड़ी कर ली। हैरानी की बात यह है कि उनकी वैध कमाई पूरे करियर में करीब 1.34 करोड़ रुपए आंकी गई, जबकि संपत्ति 100 करोड़ के पार पहुंच गई। यानी कमाई से करीब 1282% ज्यादा संपत्ति। उनकी काली कमाई का पहला बड़ा खुलासा साल 2017 में हुआ था, जब आयकर विभाग ने नोएडा स्थित उनके घर पर छापा मारा था। उस रेड में जो नजारा सामने आया वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। नोटों की गड्डियां पूजा घर, अलमारी, बिस्तर के गद्दों और यहां तक कि बाथरूम के फ्लश टैंक तक से बरामद हुई थीं। उस समय करीब 10 करोड़ रुपए कैश और लगभग 3 करोड़ रुपए की ज्वेलरी जब्त की गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि केशव लाल ने लखनऊ में दो आलीशान मकान, नोएडा में प्रॉपर्टी और चंदौली में पैतृक घर के अलावा कई जगहों पर बेनामी निवेश कर रखा है। अब विजिलेंस की कार्रवाई के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर जनता के पैसे से खड़ी इस अकूत संपत्ति की भरपाई सरकार किस तरह कराएगी और क्या इस “काली कमाई के साम्राज्य” पर बुलडोजर चलेगा या कानून का शिकंजा ही काफी होगा।






