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बुनकरो की आय, सम्मान और स्थायित्व पर सरकार का फोकस, बनेगी क्लस्टर आधारित कार्ययोजना

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प्रदेश सरकार ने बुनकरों की आय बढ़ाने, सम्मान सुनिश्चित करने और आजीविका को स्थायी बनाने को प्राथमिकता देते हुए एक नई क्लस्टर आधारित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हथकरघा विभाग की समीक्षा बैठक में बुनकरों से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में लगभग 1.99 लाख बुनकर कार्यरत हैं और इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश में छठवें स्थान पर है। कालीन, दरी और मैट उत्पादन में राज्य अग्रणी है, जबकि बेडशीट, फर्निशिंग और ब्लैंकेट जैसे उत्पादों में भी मजबूत उपस्थिति है। वर्ष 2024-25 में देश के कुल हथकरघा निर्यात ₹1178.93 करोड़ में प्रदेश का योगदान ₹109.40 करोड़ (करीब 9.27 प्रतिशत) रहा।

बुनकरों के सामने कच्चे माल की बढ़ती लागत, आधुनिक तकनीक और डिजाइन की कमी तथा सीमित बाजार पहुंच जैसी समस्याओं को देखते हुए एक समन्वित और सुदृढ़ तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके तहत बुनकर बहुल क्षेत्रों की पहचान कर क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जो केवल उत्पादन तक सीमित न होकर डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन सहित पूरी वैल्यू चेन को समाहित करेंगे।

योजना के अंतर्गत क्लस्टर चयन, बेसलाइन सर्वे, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ सतत अनुश्रवण की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक क्लस्टर में सीमित संख्या में बुनकरों को संगठित कर पंजीकृत इकाइयों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सामूहिक उत्पादन और विपणन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, आधुनिक तकनीक, उन्नत उपकरण और कौशल प्रशिक्षण से भी जोड़ा जाएगा।

डिजाइन और विपणन को मजबूत बनाने के लिए ‘डिजाइनर-कम-मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव’ तथा ‘डिजाइन हाउस/सोर्सिंग-बाइंग एजेंसी/एक्सपोर्ट हाउस’ जैसे संस्थागत तंत्र लागू किए जाएंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स और ब्रांडिंग के माध्यम से बुनकरों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। बैठक में पॉवरलूम बुनकरों के बिजली बिल में कमी लाने और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

इस दिशा में हथकरघा विभाग और पावर कॉर्पोरेशन मिलकर काम करेंगे, जिससे बुनकरों की विद्युत लागत घटे और उन्हें दीर्घकालिक राहत मिल सके। बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान भी उपस्थित रहे।

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