उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की राजनीति में कर्नैलगंज विधानसभा सीट हमेशा से चर्चा में रही है। यहां की राजनीति सिर्फ पार्टी के आधार पर नहीं, बल्कि ताकतवर परिवारों और उनके प्रभाव पर तय होती रही है। जब भी गोंडा की सियासत की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है बृजभूषण शरण सिंह का। लेकिन कर्नैलगंज की कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है, क्योंकि यहां दो बड़े राजघरानों के बीच लंबे समय से मुकाबला चलता रहा है।
दो राजघरानों की पुरानी लड़ाई
कर्नैलगंज में असली मुकाबला बरगदी कोट और भनभुवां के दो परिवारों के बीच रहा है। एक तरफ अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया, तो दूसरी तरफ योगेश प्रताप सिंह उर्फ योगी भैया। दोनों ही नेता अलग-अलग समय पर अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ते रहे हैं। कभी बीजेपी, कभी समाजवादी पार्टी, कभी कांग्रेस और कभी निर्दलीय—लेकिन सत्ता हमेशा इन्हीं दो परिवारों के बीच घूमती रही।
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2022 में बदला पूरा खेल
साल 2022 का चुनाव इस सीट के लिए बेहद खास रहा। जो दोनों परिवार सालों से एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते थे, उन्होंने इस बार साथ आने का फैसला किया। लेकिन इसके बावजूद जीत बीजेपी के अजय सिंह को मिली। इसकी सबसे बड़ी वजह मानी गई बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन, जिसने चुनाव का पूरा समीकरण बदल दिया।
2027 में और दिलचस्प होगी लड़ाई
अब नजरें 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। इस बार मुकाबला और भी ज्यादा कड़ा और रोमांचक होने वाला है। मौजूदा विधायक अजय सिंह का दावा है कि उन्होंने “राजघरानों की राजनीति” को खत्म कर दिया है और अब आम जनता सीधे अपने विधायक तक पहुंच पा रही है।
वहीं समाजवादी पार्टी का कहना है कि 2022 में दोनों परिवारों के साथ आने से मतदाता कन्फ्यूज हो गए थे। लेकिन 2027 में सीधी और साफ लड़ाई देखने को मिलेगी, जहां कोई समझौता नहीं होगा।
पिछले चुनावों का रिकॉर्ड क्या कहता है?
अगर पिछले चुनावों पर नजर डालें, तो तस्वीर और साफ हो जाती है—
- 2002: योगेश प्रताप सिंह (बसपा)
- 2007: अजय प्रताप सिंह (कांग्रेस)
- 2012: योगेश प्रताप सिंह (सपा)
- 2017: अजय प्रताप सिंह (बीजेपी)
- 2022: अजय सिंह (बीजेपी)
यानी हर बार सत्ता इन दोनों परिवारों के बीच ही घूमती रही है।
जातीय समीकरण भी अहम
कर्नैलगंज सीट पर जातीय समीकरण भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां ब्राह्मण, यादव, क्षत्रिय, मुस्लिम, दलित और कायस्थ वोटरों की अच्छी-खासी संख्या है।
- ब्राह्मण वोट कभी बीजेपी के साथ जाता है, तो कभी बृजभूषण के खिलाफ भी खड़ा हो जाता है।
- यादव और मुस्लिम वोट समाजवादी पार्टी की ताकत माने जाते हैं।
- ठाकुर वोट इस सीट पर सबसे बड़ा गेम चेंजर साबित होता है।
सबसे बड़ा सवाल: किंगमेकर कौन?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 में किंगमेकर कौन होगा? क्या बृजभूषण शरण सिंह किसी नए चेहरे को समर्थन देंगे या फिर मौजूदा विधायक अजय सिंह पर ही भरोसा जताएंगे? या फिर योगेश प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी से मजबूत वापसी करेंगे?
स्थानीय स्तर पर फिलहाल बीजेपी को बढ़त जरूर बताई जा रही है। लेकिन कर्नैलगंज की राजनीति में एक बात हमेशा सही साबित हुई है—यहां जीत सिर्फ पार्टी नहीं, बल्कि “प्रभाव और ताकत” तय करती है।
आगे क्या होगा?
अब देखना दिलचस्प होगा कि 2027 में कर्नैलगंज की सीट पर फिर से राजघरानों का दबदबा कायम होता है या बीजेपी अपनी पकड़ और मजबूत करती है।
कर्नैलगंज की राजनीति में हर चुनाव एक नई कहानी लेकर आता है—और इस बार भी मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है।






