मध्य प्रदेश में UCC की तैयारी तेज: साल के अंत तक लागू होने की संभावना, कैबिनेट में हुई चर्चा
उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं, मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने गृह विभाग को UCC का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
कैबिनेट बैठक में हुई अहम चर्चा
मंगलवार (7 अप्रैल) को हुई कैबिनेट बैठक में UCC को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान मंत्रियों और अधिकारियों से सुझाव भी मांगे गए, सरकार का लक्ष्य साल 2026 के अंत तक इस कानून को लागू करना है, इसके लिए एक हाई-लेवल पैनल गठित किया जाएगा, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
मंत्री का बयान: एक देश, एक कानून
सहकारिता मंत्री Vishvas Sarang ने कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून देश की एकता और अखंडता को मजबूत करेगा, उन्होंने बताया कि मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार जल्द ही इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
वहीं, नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने सरकार की इस पहल पर सवाल उठाए हैं, उनका कहना है कि इतने अहम मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए और सभी वर्गों को विश्वास में लेना जरूरी है, उन्होंने चेतावनी दी कि बिना व्यापक चर्चा के कानून लागू करने से सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
UCC में क्या हो सकते हैं प्रावधान?
प्रस्तावित UCC के तहत कई बड़े बदलाव संभव हैं, जिनमें:
- सभी धर्मों के लिए शादी का अनिवार्य पंजीकरण
- तलाक के लिए समान नियम
- पैतृक संपत्ति में बेटियों को बराबरी का अधिकार
- बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध उत्तराखंड और गुजरात मॉडल का अध्ययन
मध्य प्रदेश सरकार, Uttarakhand और Gujarat में लागू UCC मॉडल का गहराई से अध्ययन करेगी, उत्तराखंड में पिछले साल जनवरी में UCC लागू किया गया था, जहां लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया और संपत्ति में महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया गया वहीं, गुजरात में विवाह और तलाक को लेकर कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं। बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहना दंडनीय माना गया है, जिसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
क्या मध्य प्रदेश भी अपनाएगा सख्त रुख?
उत्तराखंड और गुजरात की तरह ही मध्य प्रदेश में भी UCC को सख्ती से लागू करने की तैयारी है, ऐसे में यह देखना अहम होगा कि प्रस्तावित कानून किस रूप में सामने आता है और इसका सामाजिक व राजनीतिक प्रभाव क्या पड़ता है।






