दौड़ती गाड़ियां… गूंजते सायरन… आसमान में मंडराता ड्रोन… और माइक से गूंजती पुलिस की आवाज – “चारों तरफ से घिर चुके हो, भागने की कोशिश मत करना!” उत्तर प्रदेश के कानपुर में उस वक्त बिल्कुल फिल्मी सीन बन गया जब 70 पुलिसकर्मियों की टीम ने 17 गाड़ियों के साथ एक गांव को छावनी में बदल दिया। ये कोई साधारण छापा नहीं था, बल्कि यूपी के एक नए “मिनी जामताड़ा” का पर्दाफाश करने का ऑपरेशन था। कानपुर के घाटमपुर इलाके के रेउना क्षेत्र में पुलिस को लंबे समय से साइबर ठगी के नेटवर्क की सूचना मिल रही थी। जांच में सामने आया कि गांव के कुछ युवक खेतों और बगीचों में बनी झोपड़ियों को अपना ठगी का अड्डा बना चुके थे। यहां से ये लोग देशभर में फोन कर कभी पुलिस अधिकारी बनकर, कभी बैंक लोन तो कभी सरकारी योजनाओं का झांसा देकर लोगों को ठगते थे।

पुलिस ने पहले सिविल ड्रेस में इलाके की रेकी की। जब पूरा इनपुट कन्फर्म हो गया तो मंगलवार शाम एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके की अगुवाई में बड़ा ऑपरेशन चलाया गया। ड्रोन से निगरानी करते हुए पूरे गांव को चारों तरफ से घेर लिया गया। जैसे ही पुलिस ने दबिश दी, गांव में अफरा-तफरी मच गई। खेतों की झोपड़ियों से 20 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया। मौके से लैपटॉप, मोबाइल फोन, सैकड़ों सिम कार्ड और कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बरामद हुए। जांच में यह भी पता चला कि एक ठग रोज 50-60 कॉल करता था और रोजाना लाखों की ठगी का नेटवर्क चल रहा था। पुलिस को 20 से 50 म्यूल बैंक अकाउंट भी मिले हैं जिनसे ठगी का पैसा घुमाया जाता था। कानपुर पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है, और इस साइबर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश अभी जारी है।






