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“बिहार में सियासी घमासान: नीतीश कुमार पर RJD का हमला, बोली—जनता के साथ हुआ बड़ा धोखा”

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बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली, एक तरफ एनडीए नेताओं ने उन्हें बधाई दी, वहीं दूसरी ओर Rashtriya Janata Dal (आरजेडी) ने इस कदम को बिहार की जनता के साथ “भयंकर धोखा” बताया है।

आरजेडी का तीखा हमला

आरजेडी के प्रवक्ता Shakti Singh Yadav ने वीडियो बयान जारी कर नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “घोड़ी कोई चढ़ा और फेरे किसी और के साथ लिए गए”, यानी जनादेश किसी और के नाम पर लिया गया और सत्ता किसी और के साथ साझा की गई।

उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा में शपथ लेने के साथ ही Nitish Kumar का राजनीतिक अध्याय समाप्त हो गया है, साथ ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था—“25 से 30, नीतीश होंगे फिनिश।”

‘आस्तीन का सांप’ वाला बयान

Shakti Singh Yadav ने अपने बयान में नीतीश कुमार को “समाजवाद का सबसे विषैला आस्तीन का सांप” तक कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता कभी भाजपा के खिलाफ खड़े होते थे, वही अब सत्ता बचाने के लिए उसके सामने झुक गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जनादेश की चोरी कर और “उधार का सिंदूर” लगाकर सुशासन का दावा करना, जनता के साथ धोखा है। आरजेडी का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

जनता करेगी हिसाब: आरजेडी

आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि बिहार की जनता इस “धोखे” का जवाब जरूर देगी और समय आने पर इसका कड़ा हिसाब करेगी, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में आकर नीतीश कुमार ने अपना राजनीतिक और नैतिक आधार खो दिया है।

एनडीए ने दी बधाई

जहां विपक्ष लगातार हमलावर है, वहीं एनडीए के नेताओं ने Nitish Kumar को राज्यसभा सदस्य बनने पर बधाई दी है,भाजपा नेताओं का कहना है कि उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता से संसद की कार्यवाही को मजबूती मिलेगी और देश को लाभ होगा।

सियासी टकराव तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में टकराव और तेज हो गया है, एक तरफ विपक्ष इसे “जनादेश का अपमान” बता रहा है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे अनुभव और नेतृत्व का विस्तार बता रहा है।

आने वाले समय में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है, जहां जनता का रुख तय करेगा कि यह फैसला राजनीतिक रणनीति था या वाकई जनता के भरोसे के साथ समझौता।

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