Home Uttar Pradesh बागपत सीट पर सियासी संग्राम तेज—RLD की वापसी या BJP का दबदबा...

बागपत सीट पर सियासी संग्राम तेज—RLD की वापसी या BJP का दबदबा कायम?

13
0

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बागपत विधानसभा सीट हमेशा से खास महत्व रखती रही है। यह सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि किसान आंदोलन, जाट नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों का केंद्र रही है। यही वह जमीन है जहां चौधरी चरण सिंह ने किसान राजनीति की मजबूत नींव रखी और उसे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उनके बाद अजित सिंह ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए बागपत को राष्ट्रीय लोक दल का मजबूत गढ़ बना दिया।

लंबे समय तक जाट-मुस्लिम समीकरण इस सीट की राजनीति की धुरी रहा, जिसने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया। लेकिन साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी की जीत ने इस परंपरागत समीकरण को तोड़ दिया और बागपत की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ। इसके बाद 2022 में भी भाजपा ने जीत दर्ज कर यह साबित किया कि अब यह सीट किसी एक दल की बपौती नहीं रही।बीते दो चुनावों में भाजपा की लगातार जीत के पीछे कई कारण रहे—हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण, मजबूत संगठन और बूथ स्तर तक की रणनीति। हालांकि 2022 में जीत का अंतर कम होना यह संकेत देता है कि मुकाबला अब पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हो गया है। इसका मतलब साफ है कि बागपत में अब हर चुनाव कांटे का होता जा रहा है।

Also Read- बाबा विश्वनाथ व काल भैरव के दरबार में सीएम योगी आदित्यनाथ ने टेका माथा

अब नजर 2027 विधानसभा चुनाव पर है, जहां मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है। जयंत चौधरी के नेतृत्व में RLD एक बार फिर इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। किसान आंदोलन के बाद जाट वोटों में जो हलचल देखने को मिली, वह RLD के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इसके अलावा गठबंधन की राजनीति भी समीकरणों को बदल सकती है।

दूसरी ओर भाजपा भी अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक, खासकर गैर-जाट और शहरी मतदाताओं पर भरोसा कर रही है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को भी चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है।

इस सीट पर सबसे बड़ा फैक्टर जाट वोट बैंक को माना जाता है। यदि जाट मतदाता एकजुट होकर किसी एक पार्टी के पक्ष में जाते हैं, तो चुनावी परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं। वहीं अगर यह वोट बंटता है, तो भाजपा को सीधा फायदा मिलने की संभावना रहती है।

बागपत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां परंपरा और बदलती राजनीति आमने-सामने हैं। एक तरफ RLD अपनी पुरानी जमीन वापस पाने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ भाजपा इस सीट को स्थायी रूप से अपने पक्ष में करने के मिशन पर काम कर रही है।

आने वाला 2027 का चुनाव तय करेगा कि बागपत फिर से पुराने राजनीतिक समीकरणों की ओर लौटेगा या नए दौर की राजनीति को स्थायी रूप से स्वीकार करेगा। फिलहाल इतना तय है कि यह सीट पश्चिमी यूपी की सबसे दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल चुनावी लड़ाइयों में से एक बनी रहेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here