महासंकल्प रैली की सफलता के बाद मायावती ने प्रदेश पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई, जिसमें सभी नेताओं ने दावा किया कि अखिलेश यादव के PDA की हवा निकल चुकी है।मायावती इस बैठक में पहले से कहीं ज्यादा आत्मविश्वास में दिखीं। उन्होंने साफ निर्देश दिए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं चलेगी। “2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी से बूथ स्तर तक तैयारी मजबूत की जाए।”मंडलवार कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर जनसंपर्क बढ़ाया जाए।”बैठक में तय हुआ कि बहुजन समाज पार्टी अब जमीन पर उतरकर दलित वोट बैंक पर फोकस करेगी।सूत्रों के मुताबिक मायावती ने पार्टी नेताओं को विधानसभा चुनाव की पूरी रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए हैं।
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16 अक्टूबर को होने वाले लखनऊ कार्यक्रम में मायावती खुद कोऑर्डिनेटर्स के साथ विस्तृत रणनीति तय करेंगी। वहीं आकाश आनंद के सभी जिलों में दौरे की भी तैयारी चल रही है। 23 साल बाद वह एक बार फिर जमीन पर उतरकर संगठन को खुद संभालने की तैयारी में हैं।बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल के मुताबिक, मायावती जल्द ही मंडल स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ कैंप कर सकती हैं ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने 2002 में किया था।यूपी की सियासत में बसपा के लिए फिलहाल ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं।
इसलिए पार्टी अब पूरी ताकत से अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को बचाने और मजबूत करने में जुट गई है।मायावती का मकसद साफ है 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा को फिर से ‘जमीन की पार्टी’ बनाना और सत्ता में वापसी की राह तैयार करना।




