उत्तर प्रदेश की सियासत में ऐसे कुछ ही नाम हैं जिनका असर गाँव से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक महसूस किया जाता है — उन्हीं में से एक हैं बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह।राजनीति में उनका अंदाज़ हमेशा बेबाक, बोलने का लहजा सीधा और बयान इतने तीखे कि चर्चा अपने आप शुरू हो जाती है।कुश्ती के अखाड़े से लेकर संसद के गलियारों तक, बृजभूषण हर जगह अपने अलग तेवर के लिए जाने जाते हैं।और अब उन्होंने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने फिर से उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है।एक इंटरव्यू में बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि एक वक्त ऐसा था जब उनका एनकाउंटर होने वाला था।उन्होंने दावा किया कि—उत्तर प्रदेश के एक मुख्यमंत्री, जो बाद में देश के प्रधानमंत्री बने, उन्होंने मेरे एनकाउंटर का आदेश दिया था… राजा के कहने पर। लेकिन मैं बजरंगबली का भक्त हूं — और बजरंगबली ने मेरी जान बचा ली।बृजभूषण के मुताबिक, वह उस रात अयोध्या में किसी का इंतज़ार कर रहे थे, तभी एक पुलिस अधिकारी ने आकर उनकी कनपटी पर रिवॉल्वर तान दी।उन्होंने कहा,मैंने मन ही मन हनुमान जी को याद किया, और जैसे ही मौका मिला, उसके बगल में फायर किया। तभी वह पुलिसवाला डरकर भाग गया और मेरी जान बची।अगली सुबह बृजभूषण उसी पुलिस अधिकारी के घर पहुंचे और पूछा —मेरी गलती क्या थी? आपने मुझे मारने की कोशिश क्यों की?तब जाकर पूरी कहानी सामने आई — यह सब एक ‘राजा’ के कहने पर किया गया था, जो उस वक्त मनकापुर के राजा आनंद सिंह थे।
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बृजभूषण ने बताया कि 1991 के चुनाव में उन्होंने राजा आनंद सिंह को हराया था, और यही राजनीतिक टकराव बाद में इस साजिश की वजह बना।उन्होंने कहा कि बाद में वही पुलिस अधिकारी उनके करीब आ गया, और जब बृजभूषण बड़ा नेता बने, तो उन्होंने उसी अधिकारी को सम्मानित भी किया।अब जब यह बयान सामने आया है, तो गोंडा और आसपास के राजनीतिक हलकों में फिर से पुराने जख्म हरे हो गए हैं।राजा आनंद सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे कृतिवर्धन सिंह, आज भारतीय जनता पार्टी के सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री हैं।हालांकि दोनों ही ठाकुर समुदाय से आते हैं और बीजेपी में उनकी गिनती बड़े नेताओं में होती है, लेकिन जानकार कहते हैं कि दोनों परिवारों के बीच तनाव की लकीरें आज भी बाकी हैं।राजनीतिक गलियारों में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर बृजभूषण ने यह पुरानी कहानी अब क्यों बताई?क्या यह किसी नए राजनीतिक संकेत की शुरुआत है?यह पहली बार नहीं है जब बृजभूषण शरण सिंह के बयान चर्चा में आए हों।उनका नाम जब भी सामने आता है — विवाद अपने आप शुरू हो जाते हैं।कभी महिला पहलवानों के आरोपों पर, कभी बीजेपी के भीतर के समीकरणों पर।हाल के महीनों में यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बृजभूषण शरण सिंह के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।कारण यह है कि बृजभूषण कई बार मोदी और शाह को अपना नेता बताते रहे हैं,जबकि योगी आदित्यनाथ ने संगठन अनुशासन के तहत इस तरह की व्यक्तिगत राजनीति से दूरी बनाने की सलाह दी थी।लेकिन बृजभूषण ने अपनी बात कभी छिपाई नहीं — और यही उनकी पहचान भी बन गई है।हालांकि योगी आदित्यनाथ ने इन सब पर अभी तक पूर्ण चुप्पी साध रखी है,लेकिन सत्ता के गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि गोंडा की राजनीति एक बार फिर सुलगने वाली है।अब इस पूरी खबर का निष्कर्ष क्या है तो वो भी आप जान लीजिये आसान और सरल भाषा में बृजभूषण शरण सिंह का यह खुलासा सिर्फ एक पुरानी याद नहीं है —यह उत्तर प्रदेश की राजनीति के उस दौर की झलक भी देता है,जब राजनीति, अपराध और ताकत — एक ही मंच पर खेला करते थे।आज वह दौर भले बदल गया हो,लेकिन एक बात साफ है —बृजभूषण शरण सिंह आज भी उत्तर प्रदेश की सियासत के सबसे चर्चा योग्य और रहस्यमय चेहरों में से एक हैं।





